शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
Asked 2 months ago · Viewed 13 times
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली, गुरुकुल परंपरा और बौद्धकालीन शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वैदिक कालीन शिक्षा में 'प्रवज्या' (Pravrajya) संस्कार बौद्ध मठों में प्रवेश और प्राथमिक शिक्षा के आरंभ का सूचक था, जबकि 'उपनयन' संस्कार वैदिक शिक्षा प्रणाली में ब्रह्मचर्य आश्रम में प्रवेश का प्रतीक था।
- 2. नालंदा विश्वविद्यालय के विपरीत, वल्लभी (Vallabhi) विश्वविद्यालय मुख्य रूप से हीनयान (Theravada) बौद्ध संप्रदाय के अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र था, जहाँ धर्म-दर्शन के साथ-साथ अर्थशास्त्र, नीतिशास्त्र और व्यवसायिक शिक्षा भी दी जाती थी।
- 3. प्राचीन काल में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल द्वारा की गई थी, जो वज्रयान बौद्ध धर्म और तांत्रिक शिक्षा के साथ-साथ तर्कशास्त्र (Logic) के अध्ययन के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि 'प्रवज्या' संस्कार बौद्ध शिक्षा प्रणाली (मठों में प्रवेश) से संबंधित है, न कि वैदिक शिक्षा से। बौद्ध धर्म में मठवासी जीवन में प्रवेश के लिए 8 वर्ष की आयु में प्रवज्या संस्कार होता था, जबकि वैदिक शिक्षा में 'उपनयन' संस्कार होता था। कथन 2 सही है; वल्लभी विश्वविद्यालय (सौराष्ट्र, गुजरात) मुख्य रूप से हीनयान बौद्ध संप्रदाय का केंद्र था और यहाँ धर्म-दर्शन के अलावा व्यावहारिक विषयों की शिक्षा भी दी जाती थी। कथन 3 सही है; पाल वंश के प्रसिद्ध शासक धर्मपाल द्वारा स्थापित विक्रमशिला विश्वविद्यालय वज्रयान बौद्ध धर्म, तंत्रविद्या और तर्कशास्त्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र था।
अगला प्रश्न →
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक कालीन शिक्षण परंपरा के संदर्भ में…
← पिछला प्रश्न
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वेदों के अध्ययन के संदर्भ…
Related Questions
→
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों, विश्वविद्यालयों और उनकी स्थापना के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) - प्रयागराज (स्थापना वर्ष: 1887)
2. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) - वाराणसी (स्थापना वर्ष: 1916)
3. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) - अलीगढ़ (स्थापना वर्ष: 1920)
4. संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) - लखनऊ (स्थापना वर्ष: 1975)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-कौन से सही सुमेलित हैं?
→
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, न्याय दर्शन और उसके प्रणेता महर्षि गौतम द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. न्याय दर्शन एक यथार्थवादी (Realistic) और विश्लेषणात्मक दर्शन है, जिसके प्रवर्तक महर्षि गौतम (अक्षपाद) हैं, और इसका मुख्य उद्देश्य तर्क और प्रमाण के माध्यम से 'मोक्ष' (दुखों की आत्यंतिक निवृत्ति) प्राप्त करना है।
2. इस दर्शन में ज्ञान प्राप्ति के लिए चार प्रमाण स्वीकार किए गए हैं: प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द (आप्तोपदेश)।
3. न्याय दर्शन के अनुसार, ईश्वर संसार का रचयिता नहीं है बल्कि वह केवल इस ब्रह्मांड का एक निमित्त कारण (Efficient Cause) है, जो पूर्व-निर्मित परमाणुओं से सृष्टि का संचालन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक कालीन गुरुकुल व्यवस्था के संदर्भ में, 'समावर्तन संस्कार' (Samavartana Sanskara) का मुख्य उद्देश्य और उसकी विशेषता निम्नलिखित में से क्या थी?
→
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक काल के अध्ययन-अध्यापन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वैदिक शिक्षा प्रणाली में औपचारिक शिक्षा की प्राप्ति से पूर्व बालक का 'उपत्ययन' (Upanayana) संस्कार संपन्न कराया जाता था, जिसे 'नयन संस्कार' भी कहा जाता था, और इस संस्कार के बाद बालक 'द्विज' (दो बार जन्मा हुआ) की संज्ञा प्राप्त करता था तथा गुरु के पास जाकर शिक्षा ग्रहण करता था।
2. ऋग्वैदिक काल में उच्च शिक्षा के अंतर्गत महिलाओं को भी अध्ययन का पूर्ण अधिकार प्राप्त था, जिसके तहत गार्गी, मैत्रेयी और अपाला जैसी विदुषी महिलाओं (ब्रह्मवादिनी) ने उच्च कोटि के दार्शनिक ज्ञान और शास्त्रों में महारत हासिल की थी।
3. वैदिक काल में शिक्षा सत्र की शुरुआत 'उपाकर्म' (Upakarma) अनुष्ठान के साथ श्रावण मास की पूर्णिमा को होती थी, जबकि शिक्षा सत्र का समापन 'उत्सर्जन' (Utsarjana) समारोह के साथ पौष या माघ मास की पूर्णिमा के दिन होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
→
इनमें से किसने अपनी रिपोर्ट में 'शिक्षा के चार स्तंभों' की बात की है?
→
चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.