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Indian Polity
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संविधान का कौन सा संशोधन 'दलबदल' से है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
52वां संशोधन।
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भारत में 'त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था' का सुझाव किस समिति ने दिया था?
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राज्य विधानसभा का नेता कौन होता है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा, राजनीतिक दलों की मान्यता तथा संविधान की विभिन्न अनुसूचियों और भागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयां अंग्रेजी भाषा में ही होंगी, जब तक कि संसद विधि द्वारा कोई अन्य प्रावधान न करे, और किसी भी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस राज्य के उच्च न्यायालय की कार्रवाइयों में हिंदी या किसी अन्य राजभाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है।
2. संविधान की नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, और इसके तहत यह प्रावधान किया गया कि इस अनुसूची में शामिल किए गए विधियों को इस आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता कि वे किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं, किंतु उच्चतम न्यायालय के 'केशवानंद भारती मामले' (1973) के निर्णय के पश्चात 24 अप्रैल 1973 के बाद इस अनुसूची में शामिल कानूनों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की जा सकती है यदि वे संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन करते हैं।
3. दलबदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) के अंतर्गत किसी राजनीतिक दल के 'विलय' (Merger) की वैधता के लिए यह संवैधानिक आवश्यकता है कि मूल राजनीतिक दल के कम से कम आधे (50%) सदस्य विलय के पक्ष में हों, अन्यथा उन सभी सदस्यों को दलबदल के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों, विशेषकर 'अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति' (अनुच्छेद 123) तथा 'वीटो शक्तियों' (अनुच्छेद 111) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को संसद के विश्रान्ति काल (Recess) में अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राष्ट्रपति की यह अध्यादेश निर्माण शक्ति संसद की विधि निर्माण शक्ति के समतुल्य होती है, किंतु राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी कर सकता है जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों और राष्ट्रपति का यह समाधान हो गया हो कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है।
2. राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित प्रत्येक अध्यादेश का प्रभाव और बल वही होता है जो संसद द्वारा अधिनियमित किसी अधिनियम का होता है, किंतु यह अनिवार्य है कि ऐसे अध्यादेश को संसद के पुनः समवेत होने पर दोनों सदनों के समक्ष रखा जाए, और यदि संसद पुनः बैठक के प्रारंभ से छह सप्ताह की अवधि के भीतर इसे अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित कर देती है, या छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने से पूर्व ही दोनों सदन इसे अननुमोदित कर देते हैं, तो अध्यादेश स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।
3. अनुच्छेद 111 के अधीन जब कोई विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के पश्चात राष्ट्रपति के समक्ष अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाता है, तो राष्ट्रपति को यह संवैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वह विधेयक पर अपनी अनुमति रोक सकता है (अत्यंतिक वीटो), उसे पुनर्विचार के लिए वापस लौटा सकता है (निलंबनकारी वीटो), या पॉकेट वीटो का प्रयोग कर सकता है, किंतु संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि राष्ट्रपति धन विधेयक (Money Bill) पर न तो अत्यंतिक वीटो का प्रयोग कर सकता है और न ही उसे पुनर्विचार के लिए संसद को वापस लौटा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) का प्रावधान है?
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