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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों, विशेषकर 'अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति' (अनुच्छेद 123) तथा 'वीटो शक्तियों' (अनुच्छेद 111) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को संसद के विश्रान्ति काल (Recess) में अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राष्ट्रपति की यह अध्यादेश निर्माण शक्ति संसद की विधि निर्माण शक्ति के समतुल्य होती है, किंतु राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी कर सकता है जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों और राष्ट्रपति का यह समाधान हो गया हो कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है।
  2. 2. राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित प्रत्येक अध्यादेश का प्रभाव और बल वही होता है जो संसद द्वारा अधिनियमित किसी अधिनियम का होता है, किंतु यह अनिवार्य है कि ऐसे अध्यादेश को संसद के पुनः समवेत होने पर दोनों सदनों के समक्ष रखा जाए, और यदि संसद पुनः बैठक के प्रारंभ से छह सप्ताह की अवधि के भीतर इसे अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित कर देती है, या छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने से पूर्व ही दोनों सदन इसे अननुमोदित कर देते हैं, तो अध्यादेश स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।
  3. 3. अनुच्छेद 111 के अधीन जब कोई विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के पश्चात राष्ट्रपति के समक्ष अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाता है, तो राष्ट्रपति को यह संवैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वह विधेयक पर अपनी अनुमति रोक सकता है (अत्यंतिक वीटो), उसे पुनर्विचार के लिए वापस लौटा सकता है (निलंबनकारी वीटो), या पॉकेट वीटो का प्रयोग कर सकता है, किंतु संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि राष्ट्रपति धन विधेयक (Money Bill) पर न तो अत्यंतिक वीटो का प्रयोग कर सकता है और न ही उसे पुनर्विचार के लिए संसद को वापस लौटा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 123 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जो संसद की विधायी शक्ति के समान होती है, बशर्ते संसद सत्र में न हो। अनुच्छेद 111 के अनुसार, राष्ट्रपति धन विधेयक को छोड़कर अन्य विधेयकों पर पुनर्विचार के लिए कह सकते हैं या वीटो का उपयोग कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों का अध्ययन करें।
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