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उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में बोली जाने वाली 'भोजपुरी' और 'अवधी' बोलियों की भाषाई विशेषताओं तथा उनके विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भोजपुरी का विकास मागधी अपभ्रंश से हुआ है, जबकि अवधी का विकास अर्धमागधी अपभ्रंश से माना जाता है, और ये दोनों ही बोलियाँ हिंदी की उपभाषा 'पूर्वी हिंदी' के अंतर्गत आती हैं।
- 2. भोजपुरी बोली में मुख्य रूप से मूर्धन्य ध्वनियों (जैसे ṭ, ḍ) का प्रयोग प्रचुरता से होता है और इसके प्रमुख व्याकरणिक रूपों में कर्ता कारक के साथ 'ने' परसर्ग (विभक्ति) का प्रयोग पश्चिमी हिंदी की तुलना में बहुत भिन्न या प्रायः अनुपस्थित होता है।
- 3. गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'रामचरितमानस' की मूल रचना अवधी बोली में की गई है, जबकि संत कबीर दास की साखी और पदों में भोजपुरी और सधुक्कड़ी भाषा का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि 'भोजपुरी' का विकास मागधी अपभ्रंश से अवश्य हुआ है, परंतु यह 'बिहारी' हिंदी उपभाषा वर्ग के अंतर्गत आती है, न कि 'पूर्वी हिंदी' के। पूर्वी हिंदी के अंतर्गत अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी बोलियाँ आती हैं (जिनका विकास अर्धमागधी अपभ्रंश से हुआ है)। कथन 2 सत्य है; भोजपुरी में 'ने' विभक्ति का प्रयोग मानक खड़ी बोली की तरह नहीं होता है और मूर्धन्य ध्वनियों का बाहुल्य होता है। कथन 3 सत्य है; तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना अवधी में की है और कबीर दास की भाषा पर भोजपुरी तथा पूर्वी बोलियों का गहरा प्रभाव है।
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3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'स्कीमा' (Schema) मानसिक संरचनाओं या ज्ञान के पैटर्न्स को संदर्भित करता है, जिन्हें बच्चा नए अनुभवों के आधार पर 'आत्मसातकरण' (Assimilation) और 'समायोजन' (Accommodation) की प्रक्रियाओं द्वारा संशोधित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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