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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक काल के अध्ययन-अध्यापन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वैदिक शिक्षा प्रणाली में औपचारिक शिक्षा की प्राप्ति से पूर्व बालक का 'उपत्ययन' (Upanayana) संस्कार संपन्न कराया जाता था, जिसे 'नयन संस्कार' भी कहा जाता था, और इस संस्कार के बाद बालक 'द्विज' (दो बार जन्मा हुआ) की संज्ञा प्राप्त करता था तथा गुरु के पास जाकर शिक्षा ग्रहण करता था।
- 2. ऋग्वैदिक काल में उच्च शिक्षा के अंतर्गत महिलाओं को भी अध्ययन का पूर्ण अधिकार प्राप्त था, जिसके तहत गार्गी, मैत्रेयी और अपाला जैसी विदुषी महिलाओं (ब्रह्मवादिनी) ने उच्च कोटि के दार्शनिक ज्ञान और शास्त्रों में महारत हासिल की थी।
- 3. वैदिक काल में शिक्षा सत्र की शुरुआत 'उपाकर्म' (Upakarma) अनुष्ठान के साथ श्रावण मास की पूर्णिमा को होती थी, जबकि शिक्षा सत्र का समापन 'उत्सर्जन' (Utsarjana) समारोह के साथ पौष या माघ मास की पूर्णिमा के दिन होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं:
1. कथन 1 सत्य है: वैदिक काल में शिक्षा की शुरुआत उपनयन संस्कार से होती थी। उपनयन का अर्थ 'गुरु के पास ले जाना' है। इस संस्कार के पश्चात बालक 'द्विज' कहलाता था।
2. कथन 2 सत्य है: ऋग्वैदिक काल में स्त्रियों की स्थिति उच्च थी। उन्हें शिक्षा का अधिकार था और गार्गी, मैत्रेयी, अपाला, घोषा जैसी विदुषियाँ ब्रह्मवादिनी (आजीवन अध्ययन करने वाली) कहलाती थीं।
3. कथन 3 सत्य है: वैदिक विद्यालयों या गुरुकुलों में अध्ययन-अध्यापन एक निश्चित अवधि के लिए होता था। शिक्षा सत्र का आरंभ 'उपाकर्म' से और समापन 'उत्सर्जन' से होता था।
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बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों और विकासात्मक आयामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विकास की प्रक्रिया सिर से पैर की दिशा (मस्तकोधोमुख विकास - Cephalocaudal Trend) और शरीर के केंद्र से परिधि की ओर (समीपदूराभिमुख विकास - Proximodistal Trend) दोनों नियमों का एक साथ अनुसरण करती है।
2. एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बाल्यावस्था (School Age) के दौरान 'उद्योग बनाम हीनता' (Industry vs. Inferiority) का संकट उत्पन्न होता है, जहाँ बालक अपनी योग्यताओं का प्रदर्शन करके समाज में निपुणता हासिल करना चाहता है।
3. जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) में बालक 'संरक्षण' (Conservation) और 'सकर्मक अनुमान' (Transitive Inference) के गुणों को पूरी तरह से आत्मसात कर लेता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन (EVS) शिक्षण के दौरान 'थीम-आधारित उपागम' (Thematic Approach) को अपनाने के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के अनुसार प्राथमिक स्तर पर EVS के पाठ्यक्रम को छह मुख्य थीमों में विभाजित किया गया है: 'परिवार और मित्र', 'भोजन', 'पानी', 'आवास', 'यात्रा' और 'हम चीजें कैसे बनाते हैं'।
2. थीम-आधारित दृष्टिकोण बच्चों को उनके परिवेश के साथ एक अखंड और अंतःविषयक (Interdisciplinary) रूप से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है, जिससे वे विज्ञान, सामाजिक अध्ययन और पर्यावरण के मुद्दों को अलग-अलग खानों में देखने के बजाय समग्र रूप से समझ पाते हैं।
3. 'परिवार और मित्र' थीम के अंतर्गत 'पौधे' और 'पशु' को उप-थीम (Sub-themes) के रूप में शामिल किया गया है, ताकि बच्चे जीव-जंतुओं और वनस्पति के साथ अपने अंतर्संबंधों को अत्यधिक संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समझ सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं प्राकृतिक संसाधनों के संदर्भ में, राज्य में 'सोनभद्र' जिला निम्नलिखित में से किस मुख्य खनिज के उत्पादन या प्रचुर भंडार के लिए पूरे राज्य में विशिष्ट पहचान रखता है?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की अवस्थाओं और 'संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करने वाले कारकों' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage, लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक में 'विकेंद्रीकरण' (Decentration), 'संरक्षण' (Conservation) और 'श्रेणीबद्धता' (Classification) की क्षमता का पूर्ण विकास हो जाता है, जिससे वह वस्तुओं को उनके किसी एक गुण के आधार पर नहीं बल्कि अनेक पक्षों से देखकर समझ सकता है।
2. पियाजे के सिद्धांत में 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage, लगभग 11 वर्ष से आगे) के दौरान किशोरों में 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-deductive Reasoning) और 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) की क्षमता विकसित होती है, जिससे वे बिना प्रत्यक्ष रूप से देखे तार्किक निष्कर्ष निकाल सकते हैं।
3. पियाजे का यह दृढ़ मत था कि बच्चों का संज्ञानात्मक विकास मुख्य रूप से उनके वयस्कों और शिक्षकों के साथ निरंतर 'सामाजिक अंतःक्रिया' (Social Interaction) और 'सांस्कृतिक उपकरणों' (Cultural Tools) के आदान-प्रदान के माध्यम से ही संभव होता है, जिसमें परिपक्वता की कोई भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं कृषि-जलवायु परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) में विभाजित किया गया है, जो यहाँ की मृदा, वर्षा और तापमान की विभिन्नताओं को दर्शाते हैं।
2. राज्य के बुंदेलखंड क्षेत्र में मुख्य रूप से लाल और परुवा मृदा पाई जाती है, जहाँ सिंचाई के साधनों की सीमित उपलब्धता के कारण चना, मटर और ज्वार जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें उगाई जाती हैं।
3. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में गन्ने का सघन उत्पादन होता है, और यह क्षेत्र देश में चीनी के कटोरे के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।
4. राज्य के तराई क्षेत्र में पाई जाने वाली मृदा अत्यधिक शुष्क, बंजर और कंकड़-पथरयुक्त होती है, जिस कारण वहाँ कृषि कार्य पूरी तरह असंभव है और केवल कांटेदार झाड़ियाँ ही उगती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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