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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'संधि' और 'संधि-विच्छेद' के विशेष नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब किसी शब्द के अंत में 'त्' या 'द्' के बाद 'ह' वर्ण आता है, तो 'त्' या 'द्' का परिवर्तन 'द्' में तथा 'ह' का परिवर्तन 'ध' में हो जाता है, जैसे कि 'उद्धार' (उत् + हार) और 'पद्धति' (पत् + हति)।
- 2. विसर्ग संधि के एक विशिष्ट नियम के अनुसार, यदि विसर्ग से पहले 'इ' या 'उ' स्वर हो और विसर्ग के बाद 'क', 'ख', 'प' या 'फ' में से कोई वर्ण आए, तो विसर्ग का परिवर्तन मूर्धन्य ष (ष्) में हो जाता है, जैसे कि 'निः + फल = निष्फल' और 'दुः + कर्म = दुष्कर्म'।
- 3. व्यंजन संधि के अंतर्गत यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद कोई अनुनासिक वर्ण (पंचम अक्षर - ङ, ञ, ण, न, म) आए, तो वर्ग का पहला वर्ण अपने ही वर्ग के तृतीय वर्ण में परिवर्तित हो जाता है, जैसे कि 'वाक् + मय = वाग्मय'।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि व्यंजन संधि के नियम के अनुसार 'त्' या 'द्' के बाद 'ह' आने पर 'त्/द्' का 'द्' और 'ह' का 'ध' हो जाता है (यथा: उत् + हार = उद्धार)। कथन 2 भी सही है; विसर्ग के नियम के अनुसार 'इ' या 'उ' के बाद विसर्ग हो और आगे क, ख, प, फ में से कोई वर्ण आए तो विसर्ग 'ष्' में बदल जाता है (यथा: निः + फल = निष्फल)। कथन 3 गलत है क्योंकि वर्ग के पहले वर्ण के बाद अनुनासिक वर्ण आने पर पहला वर्ण अपने वर्ग के 'प्रथम वर्ण के स्थान पर पंचम वर्ण' में बदलता है, तृतीय वर्ण में नहीं (जैसे: वाक् + मय = वाङ्मय, जहाँ क अपने ही वर्ग के पांचवें वर्ण ङ में बदलता है, तीसरे वर्ण ग में नहीं)। अतः विकल्प (a) सही है।
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उत्तर प्रदेश की कृषि, प्रमुख फसलों के उत्पादन और मृदा प्रारूपों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक 'गेहूं' और 'आलू' उत्पादक राज्य है, तथा खाद्यान्न उत्पादन में भी देश में इसका प्रथम स्थान है।
2. 'राड़' (Raad) और 'परवा' (Parwa) मृदा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड पठारी क्षेत्र में पाई जाने वाली उपजाऊ मिट्टियाँ हैं, जो हल्की लालिमा लिए होती हैं और इनमें मोटे अनाजों की खेती की जाती है।
3. उत्तर प्रदेश में अफीम का एकमात्र कारखाना बाराबंकी जिले में स्थित है, जबकि गाजीपुर जिले में अफीम की खेती सबसे अधिक मात्रा में की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के वन्यजीव विहारों (Wildlife Sanctuaries), पक्षी विहारों और संरक्षित क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश का सबसे पहला (प्रथम) वन्यजीव विहार 'चन्द्रप्रभा वन्यजीव विहार' है, जिसकी स्थापना 1957 में चंदौली जिले में की गई थी, जबकि राज्य का सबसे बड़ा वन्यजीव विहार 'हस्तिनापुर वन्यजीव विहार' है जो कई जिलों में फैला हुआ है।
2. 'नवाबगंज पक्षी विहार' (जिसे अब आधिकारिक रूप से 'चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार' कहा जाता है) उत्तर प्रदेश का सबसे पुराना पक्षी विहार है, जो उन्नाव जिले में स्थित है।
3. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान (Dudhwa National Park) को वर्ष 1987 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' के अंतर्गत शामिल किया गया था, और यह उत्तर प्रदेश का एकमात्र ऐसा राष्ट्रीय उद्यान है जहाँ एशियाई शेरों (Asiatic Lions) का प्राकृतिक संरक्षण किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के संदर्भ में, जौनपुर शहर की स्थापना किसने की थी और यहाँ स्थित 'अटाला मस्जिद' (Atala Masjid) का निर्माण किस सल्तनत कालीन शासक द्वारा करवाया गया था?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, अपवाह तंत्र (Drainage System) और झीलों/तालाबों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश की सबसे लंबी नदी गंगा है, जो राज्य में बिजनौर जिले से प्रवेश करती है और बलिया जिले से बाहर निकलती है, तथा इसमें मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियों में रामगंगा, गोमती, घाघरा, और यमुना प्रमुख हैं।
2. 'गोमती नदी' का उद्गम पीलीभीत जिले के फुलहर झील (मदहोता ताला) से होता है, जो मैदानी भागों से निकलने वाली गंगा की एकमात्र प्रमुख सहायक नदी है और यह गाजीपुर के पास कैथी नामक स्थान पर गंगा नदी में मिलती है।
3. 'कीठम झील' (सूर सरोवर) उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित एक प्रसिद्ध रामसर साइट है, जो प्रवासी पक्षियों और मीठे पानी के जलीय जीवों के लिए जानी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोहलबर्ग ने अपने सिद्धांत के विकास के लिए 'हाइन्ज दुविधा' (Heinz Dilemma) जैसी नैतिक कहानियों का उपयोग करके बालकों और वयस्कों के साथ दीर्घकालिक अनुदैर्ध्य (Longitudinal) अध्ययन किया था।
2. उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता (Post-conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण में व्यक्ति यह मानता है कि नियम अपरिवर्तनीय और कठोर हैं तथा उनका पालन केवल समाज में व्यवस्था बनाए रखने और सजा से बचने के लिए किया जाना चाहिए।
3. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के छह चरणों को तीन प्रमुख स्तरों (Levels) में विभाजित किया गया है, और उनके इस सिद्धांत की प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक केन गिलगन (Carol Gilligan) ने यह कहकर आलोचना की थी कि यह सिद्धांत पुरुषों और महिलाओं के नैतिक विकास के दृष्टिकोण में अंतर (विशेषकर देखभाल बनाम न्याय के नैतिक परिप्रेक्ष्य) की उपेक्षा करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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