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UPTET
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे, विधानमंडल और विशेष संस्थानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश द्विसदनीय विधानमंडल वाला राज्य है, जिसमें विधान परिषद (उच्च सदन) के सदस्यों की कुल संख्या 100 है, और इसका गठन सर्वप्रथम वर्ष 1937 में 'प्रांतीय विधान परिषद' के रूप में हुआ था।
- 2. उत्तर प्रदेश में 'राज्य मानवाधिकार आयोग' का गठन वर्ष 2002 में किया गया था, जबकि 'उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग' को एक वैधानिक निकाय के रूप में पूर्ण रूप से पुनर्गठित अधिनियम के तहत वर्ष 2004 में स्थापित किया गया।
- 3. राज्य में लोकायुक्त संस्था की स्थापना 'उत्तर प्रदेश लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1975' के तहत की गई थी, और उत्तर प्रदेश के प्रथम लोकायुक्त विशंभर दयाल थे, तथा इस पद का कार्यकाल अब संशोधन के बाद 8 वर्ष कर दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: उत्तर प्रदेश में द्विसदनीय विधानमंडल है। विधान परिषद में 100 सदस्य हैं और इसकी स्थापना 1937 में हुई थी। कथन 2 सही है: उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन 2002 में तथा राज्य महिला आयोग का पुनर्गठन अधिनियम 2004 के अंतर्गत वैधानिक रूप से किया गया। कथन 3 गलत है: उत्तर प्रदेश में लोकायुक्त अधिनियम 1975 के तहत पारित हुआ और प्रथम लोकायुक्त विशंभर दयाल थे, परंतु लोकायुक्त का कार्यकाल वर्तमान में 8 वर्ष नहीं बल्कि 8 वर्ष से घटाकर (मूलतः 6 वर्ष, संशोधन द्वारा 8 किया गया था, पुनः अधिनियम संशोधन के अनुसार इसे बदला गया है, सामान्यतः कार्यकाल 8 वर्ष नहीं है)। इसलिए कथन 3 का अंतिम भाग तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि लोकायुक्त का कार्यकाल उत्तर Pradesh संशोधन के बाद बदला गया था लेकिन 8 वर्ष की वर्तमान स्थिति गलत है। अतः केवल 1 और 2 सही हैं।
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'मूर्त्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage: लगभग 7 से 11 वर्ष) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए:
1. इस अवस्था में बालक में 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता विकसित हो जाती है, जिससे वह यह समझ जाता है कि किसी वस्तु के आकार, रूप या रंग में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, द्रव्यमान या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
2. बालक 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की योग्यता हासिल कर लेता है, जिसके कारण वह किसी समस्या या वस्तु को केवल एक ही आयाम (Dimension) से देखने के बजाय एक साथ कई पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर पाता है।
3. इस चरण के दौरान बालक 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning) करने में पूरी तरह सक्षम हो जाता है, जो इस सिद्धांत की अंतिम अवस्था की मुख्य पहचान है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विकास की प्रक्रिया 'सिर से पैर की ओर' (Cephalocaudal Trend) दिशा में आगे बढ़ती है, जिसके अंतर्गत बच्चे का सिर और मस्तिष्क का विकास उसके शरीर के अन्य अंगों की तुलना में पहले और अधिक तेजी से होता है।
2. 'समीप-दूरमुखी विकास' (Proximodistal Trend) के सिद्धांत के अनुसार, शारीरिक विकास शरीर के केंद्रीय भाग (रीढ़ की हड्डी या धड़) से शुरू होकर बाहरी अंगों यानी हाथों और उंगलियों की दिशा में आगे बढ़ता है।
3. विकास की गति संपूर्ण जीवनकाल में एक समान (Uniform) रहती है, और शैशवावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक प्रत्येक अवस्था में शारीरिक तथा मानसिक विकास की दर बिल्कुल एक जैसी होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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