शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन तथा समाज सुधार के इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का विरोध करना, एक ईश्वरवाद का प्रचार करना और हिंदू समाज में व्याप्त कुप्रथाओं जैसे सती प्रथा (जिसे 1829 में विलियम बेंटिक द्वारा कानून बनाकर अवैध घोषित किया गया था) का उन्मूलन करना था।
- 2. वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा 'प्रार्थना समाज' की स्थापना की गई थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देना, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करना और महिलाओं की शिक्षा तथा सामाजिक स्थिति में सुधार करना था।
- 3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया था, और उन्होंने पाखंड खंडिनी पताका फहराते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूरी तरह से सत्य हैं। 1. राजा राममोहन राय ने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों (जैसे सती प्रथा) का अंत करना था; 1829 के नियम XVII के तहत विलियम बेंटिक ने इसे समाप्त किया। 2. प्रार्थना समाज की स्थापना 1867 में बंबई में आत्माराम पांडुरंग ने केशव चंद्र सेन के सहयोग से की थी, जो सामाजिक सुधारों और धार्मिक शुचिता पर केंद्रित थी। 3. स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में बंबई में आर्य समाज की स्थापना की और 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए मूर्तिपूजा, कर्मकांड तथा जाति-पांति का कड़ा विरोध किया।
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक काल के अध्ययन-अध्यापन के संदर्भ में…
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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) शिक्षण के अंतर्गत भारतीय…
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक कालीन गुरुकुल व्यवस्था के संदर्भ में, 'समावर्तन संस्कार' (Samavartana Sanskara) का मुख्य उद्देश्य और उसकी विशेषता निम्नलिखित में से क्या थी?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वेदों के अध्ययन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राचीन गुरुकुल प्रणाली में शिक्षा का आरंभ 'उपनयन संस्कार' (नयन संस्कार) के साथ होता था, जो सामान्यतः 8 से 12 वर्ष की आयु के बीच संपन्न कराया जाता था, और इसके पश्चात छात्र को 'द्विज' की संज्ञा दी जाती थी।
2. वैदिक काल में उच्च शिक्षा पूरी होने के बाद छात्रों के समावर्तन संस्कार का विधान था, जिसके बाद वे 'स्नातक' कहलाते थे और गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने के लिए अपने घर लौटते थे।
3. प्राचीन काल में उत्तर प्रदेश के नैमिषारण्य को वेदों और पुराणों के अध्ययन का प्रमुख केंद्र माना जाता था, जहाँ महर्षि दधीचि और अन्य ऋषियों ने वेदों के संकलन एवं अध्यापन कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) और 'खिलाफत आंदोलन' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से दिसंबर 1920 में आयोजित कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में अनुमोदित किया गया था, जिसकी अध्यक्षता सी. विजयराघवाचारी ने की थी और इस अधिवेशन में असहयोग के कार्यक्रम को पूरी तरह स्वीकार किया गया था।
2. इस आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदत्त 'कैसर-ए-हिंद' (Kaiser-i-Hind) की उपाधि वापस कर दी थी, जबकि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नाइटहुड (Sir) की उपाधि का त्याग कर दिया था।
3. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की घटना से क्षुब्ध होकर महात्मा गांधी ने बारडोली में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की, जिसके कारण चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू जैसे नेताओं ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए 'स्वराज पार्टी' के गठन का विरोध किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) और 'गांधी-इरविन समझौते' (Gandhi-Irwin Pact) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से प्रसिद्ध 'दांडी मार्च' (Salt March) के साथ की गई थी, जिसके तहत 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़कर इस आंदोलन का देशव्यापी विस्तार किया गया था।
2. 5 मार्च 1931 को हस्ताक्षरित 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसक अपराधों में लिप्त व्यक्तियों को छोड़कर) को रिहा करने और समुद्र तट के किनारे बसे लोगों को बिना कर के अपने घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी।
3. कांग्रेस की ओर से महात्मा गांधी ने इस समझौते के बाद कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) की अध्यक्षता की थी और प्रथम गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए लंदन गए थे, जहाँ उन्होंने सांप्रदायिक पंचाट (Communal Award) के मुद्दे पर दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की मांग का पूर्ण समर्थन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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इनमें से किसने अपनी रिपोर्ट में 'शिक्षा के चार स्तंभों' की बात की है?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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