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पर्यावरण अध्ययन (EVS) शिक्षण के अंतर्गत 'जैव विविधता संरक्षण' (Biodiversity Conservation) की विधियों के संदर्भ में 'स्व-स्थाने' (In-situ) और 'बाह्य-स्थाने' (Ex-situ) संरक्षण के बीच निम्नलिखित अंतरों पर विचार कीजिए:
- 1. 'स्व-स्थाने' (In-situ) संरक्षण के अंतर्गत संकटग्रस्त पादप और जंतु प्रजातियों का संरक्षण उनके प्राकृतिक आवास (Natural Habitats) के भीतर ही किया जाता है, जिसके प्रमुख उदाहरणों में राष्ट्रीय उद्यान (National Parks), वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuaries), जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves) और पवित्र उपवन (Sacred Groves) शामिल हैं।
- 2. 'बाह्य-स्थाने' (Ex-situ) संरक्षण के अंतर्गत जीवों और वनस्पतियों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर लाकर विशेष रूप से संरक्षित कृत्रिम वातावरण में रखा जाता है, जिसके अंतर्गत वानस्पतिक उद्यान (Botanical Gardens), प्राणि उद्यान (Zoos), जीन बैंक (Gene Banks), क्रायोप्रिजर्वेशन (Cryopreservation) और बीज बैंक (Seed Banks) आते हैं।
- 3. 'सफारी पार्क' (Safari Parks) और 'अर्बोरटम' (Arboretum) को 'स्व-स्थाने' संरक्षण का सर्वोत्तम उदाहरण माना जाता है, क्योंकि इनमें वन्यजीवों को उनके मूल प्राकृतिक जंगलों में किसी भी प्रकार के मानवीय हस्तक्षेप के बिना पूर्णतः स्वतंत्र रूप से छोड़ा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 'स्व-स्थाने' (In-situ) संरक्षण वह विधि है जिसमें प्रजातियों का संरक्षण उनके प्राकृतिक आवास (जैसे राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व आदि) में ही किया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि 'बाह्य-स्थाने' (Ex-situ) संरक्षण में जीवों और पौधों को उनके प्राकृतिक आवास से निकालकर कृत्रिम या नियंत्रित परिवेश जैसे चिड़ियाघर, बॉटनिकल गार्डन, जीन बैंक या क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक द्वारा संरक्षित किया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि 'सफारी पार्क' और 'अर्बोरटम' 'बाह्य-स्थाने' (Ex-situ) संरक्षण के उदाहरण हैं, न कि स्व-स्थाने के, क्योंकि यहाँ जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर एक मानव-निर्मित या प्रबंधित घेरे में रखा जाता है। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
Related Questions
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प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौशाम्बी (वर्तमान कोसांबी जिला) प्राचीन काल में वत्स महाजनपद की राजधानी थी, जहाँ भगवान बुद्ध ने कई बार प्रवास किया था और सम्राट अशोक द्वारा यहाँ एक प्रसिद्ध स्तंभ (घोषाराम विहार के समीप) स्थापित किया गया था।
2. 'अहिच्छत्र' (Ahichchhatra) वर्तमान बरेली जिले की आँवला तहसील में स्थित प्राचीन पाञ्चाल महाजनपद की उत्तरी राजधानी थी, जिसके पुरातात्विक उत्खनन से कुषाण और गुप्त कालीन मृदभांड तथा मंदिर वास्तुकला के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
3. 'बुढ़िया का ताल' (Budhiya ka Taal) एटा जिले में स्थित एक प्रागैतिहासिक स्थल है, जहाँ से मौर्य काल के दौरान निर्मित विशाल पक्की ईंटों के मंदिर और बड़े पैमाने पर सोने के सिक्कों का खजाना प्राप्त हुआ है, जिसे गुप्त साम्राज्य की केंद्रीय टकसाल माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत और लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार, जब बालक अपनी मौजूदा मानसिक संरचना (Schema) में बिना किसी बड़े बदलाव के नए अनुभव को व्यवस्थित कर लेता है, तो इस प्रक्रिया को 'समावेशन' (Assimilation) कहा जाता है, जबकि कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality) इस बात पर केंद्रित है कि बालक समाज के नियमों, सामाजिक व्यवस्था और दूसरों की स्वीकृति को बनाए रखने के लिए नैतिक निर्णय लेता है।
2. पियाजे की 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में बालक के भीतर निगमनात्मक तर्क (Deductive Reasoning) और अमूर्त चिंतन की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है, जो कोहलबर्ग के नैतिक विकास के 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'सार्वभौमिक नैतिक विवेक अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) को समझने के लिए एक आवश्यक संज्ञानात्मक आधार प्रदान करती है।
3. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास की अवस्थाएँ अपरिवर्तनीय और सार्वभौमिक होती हैं, और उनका क्रम हमेशा पूर्व-रूढ़िगत से रूढ़िगत तथा अंततः उत्तर-रूढ़िगत स्तर की ओर ही आगे बढ़ता है, जिसे पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों की तरह पीछे की अवस्था में नहीं लौटाया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'वाक्य भेद' तथा 'वाच्य' (Voice) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रचना (बनावट) के आधार पर वाक्यों के तीन मुख्य भेद होते हैं—सरल वाक्य (Simple Sentence), संयुक्त वाक्य (Compound Sentence) और मिश्र वाक्य (Complex Sentence), जहाँ मिश्र वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य और एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य (जैसे संज्ञा, विशेषण और क्रियाविशेषण उपवाक्य) होते हैं जो 'जो', 'कि', 'चूँकि', 'यद्यपि' जैसे व्यधिकरण योजकों से जुड़े होते हैं।
2. 'कर्मवाच्य' (Passive Voice) का प्रयोग केवल अकर्मक क्रियाओं के साथ ही संभव है, क्योंकि इसमें क्रिया का सीधा संबंध कर्म से न होकर हमेशा कर्ता की प्रधानता और उसके लिंग-वचन पर आधारित होता है।
3. 'मोहन ने पत्र लिखा' (कर्तृवाच्य) वाक्य को जब कर्मवाच्य में बदला जाता है, तो उसका रूप 'मोहन द्वारा पत्र लिखा गया' बनता है, जिसमें क्रिया का लिंग और वचन कर्म ('पत्र', जो कि पुल्लिंग और एकवचन है) के अनुसार निर्धारित होता है न कि कर्ता के अनुसार।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प, एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना और पारंपरिक कलाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले के स्वदेशी, पारंपरिक और विशिष्ट हस्तशिल्प उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाना तथा स्थानीय कारीगरों को रोजगार के अवसर प्रदान करना है, जिसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2018 में की गई थी।
2. उत्तर प्रदेश के 'मुरादाबाद' जिले को उसके उत्कृष्ट 'पीतल और धातु शिल्प' (Brass and Metal Craft) के लिए 'पीतल नगरी' के रूप में जाना जाता है, जबकि 'भदोही' जिला 'कालीन निर्माण' (Carpet Industry) के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है और इसे 'कार्पेट सिटी' भी कहा जाता है।
3. 'जरी-ज़रदोज़ी' (Zari-Zardosi) कला के लिए केवल लखनऊ और वाराणसी जिले ही अधिकृत हैं, तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारंपरिक हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 'माटी कला बोर्ड' का गठन नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के चरण' (Stages of Moral Development) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Ventromedial Prefrontal Cortex - vmPFC), 'इंसुला' (Insula), और 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्कास' (Superior Temporal Sulcus) के बीच सामाजिक-संवेगात्मक निर्णय, परोपकारिता, और नैतिक दुविधा (Moral Dilemma) प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) के 'देखभाल की नैतिकता' (Ethics of Care) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, वैल्यू-बेस्ड मोरल कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Value-Based Moral Constructive Pedagogy) और विद्यार्थियों में संवेगात्मक समानुभूति, न्यायपरक दृष्टिकोण व समग्र नैतिक तर्क शक्ति के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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