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लेव वाइगोत्स्की
Asked 2 months ago · Viewed 17 times

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत, लेव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory of Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वायगोत्स्की के अनुसार बालक का संज्ञानात्मक विकास उसके सामाजिक परिवेश, संस्कृति और भाषा के साथ अंतःक्रिया (Interaction) का परिणाम होता है, और अधिगम विकास से पहले होता है (अर्थात अधिगम विकास को गति प्रदान करता है)।
  2. 2. 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) उस वास्तविक विकास स्तर और संभावित विकास स्तर के बीच का अंतर है, जिसे बालक किसी वयस्क या अधिक ज्ञानी अन्य (More Knowledgeable Other - MKO) के मार्गदर्शन और सहयोग से प्राप्त कर सकता है।
  3. 3. वायगोत्स्की द्वारा वर्णित 'निजी वाक्' (Private Speech) बालकों के संज्ञानात्मक विकास में एक बाधक कारक है, क्योंकि इसके माध्यम से बालक केवल अपनी भावनाओं को दूसरों पर थोपने का प्रयास करते हैं और इससे उनके विचारों का नियमन बाधित होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि लेव वायगोत्स्की के अनुसार संज्ञानात्मक विकास सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में होता है और अधिगम (Learning) विकास (Development) का मार्ग प्रशस्त करता है (अधिगम विकास से आगे चलता है)। कथन 2 सही है क्योंकि ZPD वास्तविक विकास स्तर (स्वयं अकेले कार्य करने की क्षमता) और संभावित विकास स्तर (मार्गदर्शन में कार्य करने की क्षमता) के बीच का अंतर है, जहाँ MKO सहायता करता है जिसे 'मचान' या 'स्काफोल्डिंग' (Scaffolding) कहा जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि वायगोत्स्की के अनुसार 'निजी वाक्' (Private Speech) बालकों के संज्ञानात्मक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण और सहायक उपकरण है, जिसके माध्यम से बच्चे अपने स्वयं के व्यवहार और विचारों को नियंत्रित (Self-Regulation) करते हैं, यह कोई बाधक कारक नहीं है।
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