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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, पियाजे द्वारा प्रतिपादित 'संवेदी-गामी अवस्था' (Sensory-Motor Stage: जन्म से 2 वर्ष तक, वस्तु स्थायित्व (Object Permanence), प्रतिवर्त क्रियाएं और लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'प्राथमिक मोटर और संवेदी कॉर्टेक्स' (Primary Motor and Sensory Cortices - शारीरिक गतियों और संवेदी इनपुट का समन्वय), 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus - स्थानिक स्मृति और प्रारंभिक वस्तु स्थायित्व का निर्माण), तथा 'अपरिपक्व प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Immature Prefrontal Cortex - कार्यशील स्मृति और प्रारंभिक प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व का अभाव) के बीच अल्प-विकसित व्हाइट मैटर कनेक्टिविटी, सिनैप्टिक जेनेसिस की तीव्र गतिकी, और डिस्ट्रीब्यूटेड कॉर्टिकल सिंक्रोनाइजेशन के प्रारंभिक चरण, तथा जॉन बोल्बी के 'संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक शैशवावस्था समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-सेंसरीमोटर ऑप्टिमाइज्ड अर्ली चाइल्डहुड पेडागोजी' (Neuro-Sensorymotor Optimized Early Childhood Pedagogy) और विद्यार्थियों में वस्तु स्थायित्व की समझ, संवेदी अन्वेषण व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की 'संवेदी-गामी अवस्था' (0-2 वर्ष) में बच्चे अपनी ज्ञानेंद्रियों और मोटर गतिविधियों के माध्यम से दुनिया का अन्वेषण करते हैं। इस दौरान 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) का विकास होता है, जिसमें हिप्पोकैम्पस (स्मृति निर्माण) और संवेदी-मोटर कॉर्टेक्स की न्यूरोनल प्लास्टिसिटी और कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह अवस्था जॉन बोल्बी के संलग्नता सिद्धांत से भी जुड़ी है, जहाँ सुरक्षित संलग्नता बच्चे को आत्मविश्वास के साथ अपने पर्यावरण का अन्वेषण करने की प्रेरणा देती है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बाल विकास एवं शिक्षण विधियाँ' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Cognitive Development Theory: संवेदी-गामी, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक और औपचारिक संक्रियात्मक चरण) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe), और 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus) के बीच स्कीमा निर्माण (Schema Formation), मानसिक संतुलन (Equilibration), और अमूर्त तार्किक प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा डेविड कोलब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle: मूर्त अनुभव, चिंतनशील अवलोकन, अमूर्त अवधारणा और सक्रिय प्रयोग) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-कॉग्निटिव ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Cognitive Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक लचीलेपन, समस्या-समाधान व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास के सिद्धांतों' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के चरण' (Pre-conventional, Conventional, and Post-conventional levels) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (vmPFC), 'इंसुला' (Insula) और 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्क्स' (STS) के बीच सामाजिक-संवेगात्मक निर्णय लेने, सहानुभूतिपूर्ण अनुनाद और न्यायपरक तार्किकता की सक्रियण गतिकी, तथा कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) द्वारा प्रतिपादित 'देखभाल का नैतिकता' (Ethics of Care) परिप्रेक्ष्य के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मूल्य-आधारित लोकतांत्रिक शिक्षाशास्त्र (Value-based Democratic Pedagogy) और विद्यार्थियों में नैतिक दुविधाओं के समाधान, सहानुभूतिपूर्ण आचरण व समग्र सामाजिक-संवेगात्मक बुद्धिमत्ता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण में 'समस्या समाधान विधि' (Problem-Solving Method) का प्रयोग करते समय निम्नलिखित में से किस चरण को सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार माना जाता है, जो विद्यार्थियों में उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल (HOTS) विकसित करता है? उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प और एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है? प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और बौद्ध कालीन शिक्षण संस्थाओं तथा प्रमुख बौद्ध विहारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में छात्र के औपचारिक अध्ययन की शुरुआत 'प्रव्रज्या' संस्कार के माध्यम से होती थी, जो लगभग 8 वर्ष की आयु में संपन्न होता था, और इस संस्कार के बाद छात्र को 'सामणेर' (Novice) कहा जाता था, जो मठ के कठोर नियमों का पालन करता था। 2. 'उपसंपदा' संस्कार बौद्ध शिक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण था, जो लगभग 20 वर्ष की आयु पूरा करने के बाद होता था, जिसके पश्चात छात्र पूर्ण भिक्षु (Bhikkhu) या भिक्षुणी बन जाता था और उसे संघ की पूर्ण सदस्यता प्राप्त होती थी। 3. नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम द्वारा की गई थी, जो महायान बौद्ध धर्म की शिक्षा का प्रमुख केंद्र था, और यहाँ चीनी यात्री ह्वेनसांग ने न केवल अध्ययन किया था बल्कि कुछ समय तक अध्यापन कार्य भी किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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