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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के विकासात्मक सिद्धांत' (Theory of Cognitive Growth) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage)**—जिसे उस संज्ञानात्मक विकास की अंतिम अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बच्चा वस्तुओं, घटनाओं और विचारों को व्यक्त करने के लिए मानसिक प्रतीकों, भाषा, और अमूर्त कोड (Abstract Codes) का उपयोग करने में पूरी तरह सक्षम हो जाता है, जिसमें दृश्य छवियों या भौतिक क्रियाओं की प्रत्यक्ष निर्भरता समाप्त हो जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking), भाषा-मध्यस्थ संज्ञान (Language-mediated Cognition) और तार्किक प्रतीकीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में तीन अवस्थाएँ शामिल हैं: अधिसंज्ञानात्मक/क्रियात्मक (Enactive - कार्यों द्वारा), दृश्य-प्रतिमात्मक (Iconic - छवियों द्वारा), और प्रतीकात्मक (Symbolic - भाषा और प्रतीकों द्वारा)। 'प्रतीकात्मक अवस्था' में बच्चा अमूर्त विचारों, भाषा और तार्किक प्रतीकों के जरिए दुनिया को समझने और संप्रेषित करने में सक्षम होता है। यह उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं और औपचारिक शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रीता और जे. एस. ड्रेवर (Drever) अथवा सामान्य मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान (Mental Hygiene) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'असमायोजन और रक्षात्मक युक्तियाँ (विशेषकर युक्तिकरण या रेशनलाइजेशन - Rationalization)'**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी विफलताओं, अवांछनीय व्यवहारों, या आंतरिक संघर्षों को छिपाने या उनसे उत्पन्न होने वाली चिंता से बचने के लिए तार्किक, बौद्धिक रूप से स्वीकार्य लेकिन पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत बहाने या कारण प्रस्तुत करता है ताकि समाज और स्वयं की नज़रों में उसकी छवि सुरक्षित रह सके (उदाहरणार्थ: 'अंगूर खट्टे हैं' या 'लोमड़ी और खट्टे अंगूर' की कहावत) — के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, तार्किक स्वावलंबन और आत्म-मूल्यांकन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा के सिद्धांत' (Humanistic Theory of Motivation / Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)**—जिसे उस सर्वोच्च मनोवैज्ञानिक आवश्यकता के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति अपनी पूर्ण आंतरिक क्षमताओं, प्रतिभाओं और सृजनात्मक संभावनाओं को पूरी तरह विकसित और जागृत कर लेता है तथा अपने जीवन के चरम लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यक्तिगत विकास, आंतरिक उत्कृष्टता और अर्थपूर्ण अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अधिगम शैली—**'अभिसारी अधिगम शैली' (Convergent Learning Style)**—जिसे उस व्यावहारिक और संज्ञानात्मक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ शिक्षार्थी अमूर्त अवधारणाओं (Abstract Conceptualization) और सक्रिय प्रयोग (Active Experimentation) का संयोजन करके तकनीकी कार्यों, समस्याओं के एकल सही समाधान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों में अपनी दक्षता का प्रदर्शन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विश्लेषण, तकनीकी कौशल और समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत' (Humanistic Theory of Motivation / Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आवश्यकताओं के पदानुक्रम' (Deficiency Needs vs. Growth Needs) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ—विशेषकर 'न्यूनता संबंधी आवश्यकताएं' (D-Needs जैसे दैहिक व सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं) और 'विकास संबंधी आवश्यकताएं' (B-Needs जैसे आत्म-सिद्धि या Self-Actualization)—एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक अभिप्रेरणा, संवेगात्मक सुरक्षा, और समग्र व्यक्तित्व विकास के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मनोवैज्ञानिक अवधारणा—**'आत्म-प्रभावीकारिता' (Self-Efficacy)**—जिसे किसी विशिष्ट परिस्थिति में सफलता प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्यों को निष्पादित करने की अपनी क्षमता के बारे में व्यक्ति के अपने व्यक्तिगत विश्वास और आंतरिक आकलन के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लक्ष्य-निर्धारण, दृढ़ता (Perseverance), चुनौतियों का सामना करने की क्षमता और शैक्षणिक अभिप्रेरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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