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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—**'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage)**—जिसे लगभग 2 से 7 वर्ष की आयु के बीच परिभाषित किया जाता है, जहाँ बालक प्रतीकात्मक विचारों और भाषा का उपयोग करना तो सीख जाता है, किंतु वह केंद्रीय संज्ञानात्मक सीमा—**'आत्म-केंद्रितता' (Egocentrism)**—(अर्थात यह असमर्थता कि बालक इस बात को समझने में विफल रहता है कि अन्य लोग उसके अपने दृष्टिकोण से अलग दृष्टिकोण या विचार भी रख सकते हैं) से ग्रसित होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक परिप्रेक्ष्य ग्रहण (Perspective-taking), संवादात्मक विकास और बहु-आयामी चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (2-7 वर्ष) में बालकों में 'आत्म-केंद्रितता' (Egocentrism) एक प्रमुख संज्ञानात्मक विशेषता होती है। इसका तात्पर्य यह है कि बालक इस बात को समझने में असमर्थ होते हैं कि दूसरा व्यक्ति दुनिया को किस रूप में देखता है या उनका दृष्टिकोण बालक के अपने दृष्टिकोण से भिन्न हो सकता है (जैसे- तीन पर्वतों का प्रयोग)। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में शिक्षकों को यह समझना चाहिए कि इस अवस्था के बालक दूसरों के परिप्रेक्ष्य को समझने में असमर्थ होते हैं, इसलिए उनके सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास के विस्तार के लिए विभिन्न प्रकार की सहयोगात्मक गतिविधियाँ, खेल और रोल-प्ले (Role-play) आयोजित किए जाने चाहिए ताकि वे धीरे-धीरे अन्य दृष्टिकोणों के प्रति जागरूक हो सकें।
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