BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
5 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के सिद्धांत' (Theory of Instruction) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय शिक्षण पद्धति—**'स्पाइरल पाठ्यक्रम या चक्राकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum)**—जिसे उस शैक्षिक अभिकल्पना के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बुनियादी और जटिल विचारों को बार-बार (चक्राकार रूप में) कम उम्र से लेकर उच्च स्तर तक पढ़ाया जाता है, और प्रत्येक पुनरावृत्ति के साथ ज्ञान का दायरा और जटिलता का स्तर क्रमिक रूप से बढ़ता जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान के समेकन, दीर्घकालिक स्मृति (Long-term Memory) और अमूर्त संरचनाओं के क्रमिक आंतरिककरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) का 'स्पाइरल पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) इस प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथन पर आधारित है कि 'किसी भी विषय को किसी भी विकासात्मक अवस्था में बौद्धिक रूप से सही ढंग से सिखाया जा सकता है।' ब्रूनर के अनुसार, ज्ञान को पुनरावृत्ति के माध्यम से सरल से जटिल की ओर क्रमिक रूप से विकसित किया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थी की बढ़ती संज्ञानात्मक क्षमताओं के साथ अधिगम का स्तर भी गहरा हो सके। यह दृष्टिकोण संज्ञानात्मक संरचना (Schema) के विकास, अंतर्ज्ञान (Intuition) और पूर्व-ज्ञान के साथ नए ज्ञान के सक्रिय एकीकरण पर बल देता है। अतः विकल्प (b) इस अवधारणा के वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'सम्बन्धवाद या प्रयास एवं त्रुटि के सिद्धांत' (Trial and Error Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)**—जिसे उस मूलभूत मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अनुसार यदि किसी अनुक्रिया (Response) के पश्चात संतोषजनक, सुखद या सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं, तो उस उद्दीपक (Stimulus) और अनुक्रिया के बीच का बंधन या संयोजन मजबूत हो जाता है, जबकि असंतोषजनक या दंडात्मक परिणाम मिलने पर वह संबंध कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सुदृढ़ीकरण, संतोषजनक अनुक्रियाओं के चयन और स्थायी अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद या प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) की अवधारणा—जिसके तहत जब कोई तंत्रिका मार्ग (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे ऐसा करने दिया जाता है, तो उसे संतोष (Satisfaction) प्राप्त होता है तथा जब वह तैयार नहीं होता और उसे विवश किया जाता है, तो झुंझलाहट या असंतोष उत्पन्न होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, अधिगम की तत्परता और मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'मूर्त अनुभव से सक्रिय प्रयोग तक की चार-चरणीय चक्रीय प्रक्रिया' (Four-Stage Cyclical Process from Concrete Experience to Active Experimentation)**—जिसे उस व्यापक मनोवैज्ञानिक ढांचे के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी पहले किसी प्रत्यक्ष परिस्थिति का सामना करता है (मूर्त अनुभव), फिर उसका विश्लेषण और मूल्यांकन करता है (विचारशील अवलोकन), उसके आधार पर अमूर्त अवधारणाओं और सिद्धांतों का निर्माण करता है (सार्वद्रीकरण/अमूर्त संकल्पना), और अंत में उन सिद्धांतों को नए और व्यावहारिक रूपों में परीक्षण करता है (सक्रिय प्रयोग)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र संज्ञान, चिंतन की लचीलापन और अनुकूली अधिगम रणनीतियों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी अधिगम सिद्धांत' (Humanistic Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अर्थपूर्ण अनुभवात्मक अधिगम' (Significant / Experiential Learning)**—जिसे उस प्रकार के गहरे और परिवर्तनकारी अधिगम के रूप में परिभाषित किया जाता है जो केवल तथ्यों को याद रखने (Cognitive) तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसमें शिक्षार्थी की व्यक्तिगत संलिप्तता, उसके संवेगों, इच्छाओं और संपूर्ण व्यक्तित्व का समावेश होता है, तथा जो शिक्षार्थी के व्यवहार, दृष्टिकोण और भविष्य के विकल्पों को मौलिक रूप से रूपांतरित कर देता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-निर्देशित अधिगम (Self-Directed Learning), आंतरिक प्रेरणा और व्यक्तिगत विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'व्यक्तित्व की संरचना' (Structure of Personality) में 'अहं रक्षा तंत्र' (Ego Defense Mechanisms) के एक विशिष्ट प्रकार के रूप में वर्णित 'तर्कसंगतीकरण' (Rationalization) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपनी असफलताओं, अस्वीकार्य व्यवहारों या अनैतिक इच्छाओं को समाज-स्वीकार्य और तार्किक कारणों से ढंकने का प्रयास करता है ताकि वह अपनी आत्म-छवि (Self-Image) और आत्म-सम्मान को मानसिक आघात से बचा सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के रक्षात्मक व्यवहार, मानसिक समायोजन, और तनाव प्रबंधन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.