त्वरित लिंक्स
MPTET
6 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—**'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास' (Social Contract and Individual Rights Orientation)**—जिसे उत्तर-पारंपरिक नैतिकता (Post-conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले उस उन्नत नैतिक चरण के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति कानूनों और नियमों को कठोर और अपरिवर्तनीय मानने के बजाय सामाजिक कल्याण, आपसी सहमति और मानवाधिकारों के संदर्भ में देखता है, और यह मानता है कि यदि कोई कानून समाज के बुनियादी अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहता है, तो उसे लोकतांत्रिक तरीकों से बदला जाना चाहिए—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक मूल्यों, तार्किक निर्णय लेने की क्षमता, नागरिक उत्तरदायित्व और आलोचनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास' (जो कि उत्तर-पारंपरिक स्तर का हिस्सा है) वह चरण है जहाँ व्यक्ति कानून और समाज के नियमों को एक सामाजिक अनुबंध के रूप में देखता है। इस स्तर पर बालक या वयस्क यह समझ विकसित करते हैं कि नियम सभी के कल्याण के लिए बनाए गए हैं और यदि कोई नियम अन्यायपूर्ण है या व्यक्तिगत अधिकारों का हनन करता है, तो उसे सुधारा जा सकता है। यह चरण विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, तार्किक निर्णय लेने और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देने के लिए कक्षा-कक्षीय शिक्षण में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक-संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Social-Cognitive Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अवलोकनयात्मक अधिगम' (Observational Learning / Modeling) की चार प्रमुख प्रक्रियाओं—(1) अवधान (Attention), (2) धारण (Retention), (3) पुनरुत्पादन (Reproduction), और (4) अभिप्रेरण/पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)—तथा उनके द्वारा वर्णित 'स्वयं-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की संकल्पना के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में सकारात्मक रोन-मॉडलिंग (Role Modeling) और विद्यार्थियों के स्वायत्त नियमन (Self-Regulation) के विकास के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Trial and Error Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अनुसार जब कोई तंत्रिका मार्ग (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे कार्य करने दिया जाता है, तो इससे व्यक्ति को संतोष या आनंद की प्राप्ति होती है, और जब तंत्रिका मार्ग तैयार होने के बावजूद उसे कार्य नहीं करने दिया जाता या अनुत्तीर्ण रखा जाता है, तो इससे झुंझलाहट या असंतोष उत्पन्न होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, मानसिक तैयारी और प्रभावी अधिगम संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, नॉर्मन मंटगोमेरी मूक (Norman L. Munn) एवं जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम शैलियों' (Learning Styles) तथा डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'प्रयोगात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित चार प्रमुख अधिगम शैलियों—अभिसारी (Converging), अपसारी (Diverging), आत्मसात्कारी (Assimilating), और समायोजक (Accommodating)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक विविधताओं, अनुभव-आधारित संकल्पनाओं, और समस्या-समाधान रणनीतियों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—**'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage)**—जिसे लगभग 7 से 11 वर्ष की आयु के दौरान विकसित होने वाली उस मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक मूर्त वस्तुओं और वास्तविक घटनाओं के आधार पर तार्किक चिंतन, वर्गीकरण (Classification), और संरक्षण (Conservation) के गुणों को भली-भांति समझ लेता है, किंतु अमूर्त विचारों और काल्पनिक परिकल्पनाओं के साथ तार्किक संचालन करने में असमर्थ रहता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक कौशल, आनुभविक अन्वेषण और संज्ञानात्मक संतुलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'सुरक्षित संलग्नता' (Secure Attachment) की अवधारणा—जिसके तहत शिशु अपने प्राथमिक देखभालकर्ता (Primary Caregiver) को एक सुरक्षित आधार (Secure Base) के रूप में उपयोग करते हुए पर्यावरण की खोजबीन करने में सक्षम होते हैं तथा देखभालकर्ता की अनुपस्थिति में संकट महसूस करने के बावजूद उसकी वापसी पर आसानी से शांत और संतुष्ट हो जाते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के भावनात्मक नियमन, सामाजिक-संवेगात्मक विकास और साहसिक अन्वेषण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.