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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित **'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage)** की एक अत्यंत विशिष्ट और महत्वपूर्ण सीमा—**'अहमकेन्द्रिता या आत्मकेन्द्रिता' (Egocentrism)**—जिसके तहत बच्चा यह मान लेता है कि दूसरे लोग भी दुनिया को ठीक वैसे ही देखते, महसूस करते और सुनते हैं जैसे वह खुद देखता है, और वह अन्य व्यक्तियों के दृष्टिकोण (Perspective-taking) को समझने में असमर्थ होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक संज्ञान, विकेंद्रीकरण (Decentration) की प्रक्रिया और संवादात्मक अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, लगभग 2 से 7 वर्ष की आयु (पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था) के बच्चों में 'अहमकेन्द्रिता' (Egocentrism) पाई जाती है, जिसका अर्थ है कि बच्चा केवल अपने दृष्टिकोण से दुनिया को देखता है और दूसरों के परिप्रेक्ष्य को समझने में असमर्थ होता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में, एक शिक्षक को यह समझना चाहिए कि यह विकासात्मक अवस्था स्वाभाविक है। इस सीमा को दूर करने और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को सहयोगात्मक शिक्षण, रोल-प्ले (Role-play), समूह गतिविधियों और संवाद के अवसर प्रदान करने चाहिए, जिससे बच्चे अन्य सहपाठियों के दृष्टिकोण को समझ सकें। अतः विकल्प (c) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
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