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Indian Polity
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भारत का संविधान 'विधि का शासन' (Rule of Law) किस अनुच्छेद के अंतर्गत सुनिश्चित करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 14 में निहित 'विधि के समक्ष समानता' का सिद्धांत ही 'विधि का शासन' का आधार है।
Related Questions
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसी नागरिकता का निरंतर धारक बना रहेगा (संसदीय विधियों के अधीन रहते हुए नागरिकता का अधिकार)।
2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'वंश द्वारा' (By Descent) नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य नियम है कि 10 दिसंबर 1992 को या उसके पश्चात विदेश में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति के माता-पिता में से कम से कम कोई एक जन्म के समय भारत का नागरिक होना चाहिए, और उसका जन्म भारत के बाहर किसी भारतीय समयानुसार पंजीकृत консуलेट में कराया जाना चाहिए।
3. अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति प्रदान करता है, और इस शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 बनाया है जिसमें अब तक कई बार संशोधन किए जा चुके हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो वह स्वतः ही भारत का नागरिक नहीं रहता है, और यह नियम केवल शांति काल पर लागू होता है, आपातकाल के दौरान इस पर रोक लगाई जा सकती है।
2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'देशीकरण' (Naturalization) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि आवेदक किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय नागरिकों को देशीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने से वंचित किया जाता हो।
3. संसद को यह अनन्य संवैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वह नागरिकता के अर्जन और उसकी समाप्ति से संबंधित किसी भी विषय पर कानून बना सके, और इसी शक्ति के प्रयोग के माध्यम से संसद ने अब तक नागरिकता अधिनियम, 1955 में कई बार संशोधन किए हैं, जैसे कि वर्ष 2019 का नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के गठन, सीटों के आरक्षण और उनकी वित्तीय शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-D के अनुसार प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले कुल स्थानों की संख्या का कम से कम एक-तिहाई भाग महिलाओं के लिए आरक्षित होगा (जिसमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की महिलाओं के लिए आरक्षित स्थान भी शामिल हैं), तथा यह आरक्षण प्रत्येक पंचायत में चक्रानुक्रम (Rotation) से विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को आवंटित किया जाएगा।
2. अनुच्छेद 243-H के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, प्रत्येक पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग का गठन करेगा, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और राज्यपाल को उन सिद्धांतों की संस्तुति करेगा जिनके आधार पर राज्य द्वारा संचित निधि से पंचायतों को सहायता-अनुदान दिया जाना चाहिए।
3. अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा पंचायतों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जो उन्हें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के संबंध में योजनाएं तैयार करने और उनके क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी बनाने हेतु आवश्यक हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) तथा राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, और यह शक्ति मुख्य रूप से उन क्षेत्रों पर लागू होती है जो पहले से भारतीय संघ का हिस्सा नहीं हैं (बाहरी राज्यों का प्रवेश)।
2. अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी भी राज्य के क्षेत्रफल में वृद्धि, कमी या उसकी सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है, और इसके लिए प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयक को संसद में पुनःस्थापित करने से पूर्व संबंधित राज्य के विधानमंडल की पूर्व सहमति प्राप्त करना अनिवार्य होता है, और राज्य विधानमंडल का नकारात्मक मत संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
3. 'संविधान (सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015' के माध्यम से भारत और बांग्लादेश के बीच कुछ भू-भागों के अंतरण (Exchange of Enclaves) को प्रभावी बनाया गया था, जिसके लिए यह स्पष्ट किया गया कि विदेशी राज्य को भारतीय भू-भाग सौंपने के लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता होती है, जबकि देश के भीतर राज्यों की सीमाओं के निर्धारण के लिए साधारण बहुमत पर्याप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के कुल सदस्यों में से ब्रिटिश प्रांतों के प्रतिनिधियों का चयन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति (अपरिवर्तनीय एकल संक्रमणीय मत) के माध्यम से किया जाना था, जबकि देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा नामित किया जाना था।
2. संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को आयोजित की गई थी, जिसमें संविधान सभा के सदस्यों द्वारा भारतीय संविधान पर हस्ताक्षर किए गए और इसी दिन संविधान सभा का अस्तित्व समाप्त हो गया, हालांकि यह सभा प्रथम आम चुनावों के पश्चात नई संसद के गठन तक अंतरिम संसद के रूप में कार्य करती रही।
3. संविधान सभा द्वारा कुल 22 मुख्य समितियों (Committees) का गठन किया गया था, जिसमें संघ शक्ति समिति के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे, प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे, और प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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