BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
5 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी अधिगम सिद्धांत' (Humanistic Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रयोगभावी या अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) की अवधारणा—जिसके तहत अधिगम तब सार्थक और परिवर्तनकारी बनता है जब शिक्षार्थी किसी प्रत्यक्ष, वास्तविक और समस्या-मूलक परिस्थिति में सक्रिय रूप से भाग लेता है, अपनी जिज्ञासाओं और आंतरिक प्रेरणाओं के आधार पर विषय-वस्तु को अपने व्यक्तिगत जीवन से जोड़ता है, तथा शिक्षक एक 'सुविधादाता या सहजकर्ता' (Facilitator) की भूमिका निभाते हुए उसके स्व-निर्देशित (Self-Directed) विकास का समर्थन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वायत्त ज्ञान-निर्माण, आंतरिक अभिप्रेरणा और सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

कार्ल रोजर्स के मानवतावादी अधिगम सिद्धांत (Humanistic Learning Theory) के अनुसार, 'अनुभवात्मक या प्रयोगभावी अधिगम' (Experiential Learning) वह प्रक्रिया है जो शिक्षार्थी के व्यक्तिगत अनुभवों, आंतरिक प्रेरणा और पूर्णतः कार्यशील व्यक्ति बनने की क्षमता पर जोर देती है। इस उपागम में, अधिगम सबसे अधिक सार्थक और गहरा तब होता है जब छात्र स्वयं अपनी समस्याओं का सामना करते हैं और शिक्षक एक 'सहजकर्ता या सुविधादाता' (Facilitator) के रूप में उनकी स्वतंत्रता, आत्म-स्वीकृति और आंतरिक अभिप्रेरणा को बढ़ावा देते हैं। विकल्प (b) इस अवधारणा के वैज्ञानिक और कक्षा-कक्षीय निहितार्थों को पूरी तरह से सही रूप में प्रस्तुत करता है।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-Conventional Level) के अंतिम चरण—यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति बाहरी सामाजिक नियमों, कानूनों या प्राधिकरण की परवाह किए बिना अपने स्वयं के अंतःकरण, सार्वभौमिक न्याय के सिद्धांतों, मानवाधिकारों और व्यक्तिगत नैतिकता के आधार पर सही या गलत का निर्णय लेता है, भले ही वे नियम सामाजिक कानूनों के विरोध में क्यों न हों—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक नैतिक तर्क, स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय शैक्षणिक अवधारणा—**'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD)**—जिसे वास्तविक विकास स्तर (जो बच्चा स्वतंत्र रूप से कर सकता है) और संभावित विकास स्तर (जो वयस्क या अधिक सक्षम साथी के मार्गदर्शन में किया जा सकता है) के बीच के अंतर के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पाद (Scaffolding), सहयोगात्मक समस्या-समाधान और उच्च-स्तरीय मानसिक प्रक्रियाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत' (Social Cognitive Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'स्व-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक विश्वास के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से व्यक्ति यह आकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति में अपेक्षित परिणामों को प्राप्त करने के लिए अपने व्यवहार और क्रियाओं को सफलतापूर्वक निष्पादित करने में कितना सक्षम है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा नियमन (Motivation Regulation), शैक्षणिक दृढ़ता (Academic Resilience) और लक्ष्य-प्राप्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मानसिक निरूपण स्तर—**'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation)**—जिसे लगभग बाल्यावस्था के उत्तरार्ध और किशोरावस्था के दौरान विकसित होने वाली उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक मूर्त वस्तुओं या चित्रों के सहारे के बिना, अमूर्त प्रतीकों, भाषा, तार्किक संकेतों, गणितीय सूत्रों और कोडिंग प्रणालियों के माध्यम से वास्तविक दुनिया को मानसिक रूप से प्रस्तुत और विश्लेषित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, औपचारिक संक्रियात्मक विकास और उन्नत वैचारिक संकल्पनाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'लग्नता या लगाव सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'असुरक्षित-प्रतिरोधी लगाव' (Insecure-Resistant / Ambivalent Attachment) तथा 'असुरक्षित-अवरुद्ध लगाव' (Insecure-Avoidant Attachment) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन (Emotional Regulation), साथियों के साथ सामाजिक अंतःक्रिया, और शिक्षक-विद्यार्थी संबंध (Teacher-Student Relationship) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.