BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
5 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) की अवधारणा—जिसके तहत जब कोई तंत्रिका पथ (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे ऐसा करने दिया जाता है, तो इससे व्यक्ति को आनंद या संतोष की प्राप्ति होती है, जबकि तैयार होने पर यदि उसे कार्य करने से रोका जाता है या बिना तैयार हुए बलपूर्वक कार्य कराया जाता है, तो इससे झुंझलाहट या असंतोष उत्पन्न होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा के स्तर, अनुकूलतम अधिगम वातावरण के सृजन और मानसिक तत्परता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के दृष्टिकोण से एडवर्ड थार्नडाइक के सीखने के मुख्य नियमों में से एक 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस नियम का मूल आधार यह है कि अधिगम तभी सबसे अधिक प्रभावी और संतोषजनक होता है जब शिक्षार्थी का तंत्रिका तंत्र (Nervous System) उस कार्य को सीखने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार होता है। यदि छात्र सीखने के लिए तैयार है और उसे उचित अवसर मिलता है, तो उसे संतोष (Satisfaction) मिलता है और S-R (Stimulus-Response) बॉन्ड मजबूत होता है। इसके विपरीत, तत्परता के अभाव में या बाधा उत्पन्न होने पर असंतोष होता है, जो अधिगम को बाधित करता है। अतः विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक सिद्धांत के कक्षा-कक्षीय निहितार्थ को सबसे सटीक और वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट करता है।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'रूपूपण या शेपिंग' (Shaping / Method of Successive Approximations)**—जिसे उस व्यवहारवादी शिक्षण तकनीक के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से किसी जटिल या नए वांछित व्यवहार को अचानक प्रकट होने की अपेक्षा, अंतिम लक्ष्य की ओर ले जाने वाले छोटे-छोटे क्रमिक सन्निकटों (Successive Approximations) या चरणों को सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) प्रदान करते हुए धीरे-धीरे गढ़ा या विकसित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के जटिल कौशलों के अर्जन, अनुकूली व्यवहारों के निर्माण और सकारात्मक सुदृढ़ीकरण (Positive Reinforcement) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Humanistic Theory of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)**—जिसे उस सर्वोच्च मनोवैज्ञानिक आवश्यकता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी संपूर्ण आंतरिक क्षमताओं, अद्वितीय योग्यताओं, सर्जनात्मक संभावनाओं और व्यक्तिगत विकास की चरम सीमा को प्राप्त करने के लिए अभिप्रेरित होता है, और यह स्तर तभी प्राप्त होता है जब उसकी सभी आधारभूत आवश्यकताएँ (जैसे शारीरिक, सुरक्षा, अपनेपन और सम्मान की आवश्यकताएँ) संतोषजनक रूप से पूरी हो चुकी होती हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र विकास, आंतरिक प्रेरणा और उच्च-स्तरीय शैक्षणिक उपलब्धियों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी शिक्षण सिद्धांत' (Humanistic Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सुगमकर्ता या फैसिलिटेटर के रूप में शिक्षक' (Teacher as a Facilitator)**—जिसे उस लोकतांत्रिक और सहानुभूतिपूर्ण शैक्षणिक भूमिका के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षक कक्षा में ज्ञान थोपने वाले या सत्तावादी नियंत्रक के रूप में कार्य करने के बजाय एक ऐसे मार्गदर्शक, सहायक और सुरक्षित मनोवैज्ञानिक वातावरण के प्रस्तोता की भूमिका निभाता है जो शिक्षार्थी की आंतरिक जिज्ञासा, स्वायत्तता और आत्म-निर्देशित अधिगम (Self-Directed Learning) को स्वाभाविक रूप से पोषित और प्रोत्साहित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के भावनात्मक संवर्धन, सार्थक अनुभवात्मक ज्ञान और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'मूर्त अनुभव से सक्रिय प्रयोग तक की प्रक्रिया' (Concrete Experience to Active Experimentation)**—जिसे उस चार-चरणीय चक्रीय अधिगम मॉडल के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी पहले किसी नई परिस्थिति का प्रत्यक्ष मूर्त अनुभव (Concrete Experience) प्राप्त करता है, फिर उसका चिंतनशील अवलोकन (Reflective Observation) करता है, उसके बाद अमूर्त अवधारणाओं और सामान्यीकरणों का निर्माण (Abstract Conceptualization) करता है, और अंत में नए ज्ञान का परीक्षण करने के लिए सक्रिय प्रयोग (Active Experimentation) करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के चक्रीय संज्ञान, अनुभवात्मक प्रसंस्करण और प्रायोगिक अनुप्रयोग के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'असुरक्षित-प्रतिरोधी या उभयभावी संलग्नता' (Insecure-Resistant / Ambivalent Attachment) की अवधारणा—जिसके तहत शिशु माता-पिता (देखभाल करने वाले) की उपस्थिति में भी अत्यधिक चिपके रहने वाला व्यवहार प्रदर्शित करता है, अन्वेषण करने में असमर्थ होता है, तथा जब देखभाल करने वाला व्यक्ति कमरे से बाहर जाता है तो अत्यधिक तीव्र संकट (Extreme Distress) और रोना व्यक्त करता है, किंतु जब वह वापस लौटता है तो वह क्रोध, विरोध और सांत्वना चाहने के बीच लगातार झूलता रहता है (यानी वह एक ही समय में गले लगना चाहता है और धक्का भी देता है)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन (Emotional Regulation), विद्यालयी समायोजन और सुरक्षित शिक्षण वातावरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.