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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत' (Sociocultural Theory of Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'चान्त्वन/मचान' (Scaffolding) की अवधारणाओं—विशेषकर जेरोम ब्रूनर द्वारा विस्तारित मचान की तकनीक, आंतरिक वाक् (Inner Speech), और सामाजिक अंतःक्रिया के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संज्ञान के सह-निर्माण (Co-construction of Knowledge), आत्म-नियमन (Self-Regulation), और उच्च-स्तरीय मानसिक कार्यों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत में 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (ZPD) उस अंतर को दर्शाता है जो एक शिक्षार्थी द्वारा 'स्वयं की स्वतंत्र समस्या-समाधान क्षमता' और 'वयस्क या अधिक ज्ञानी अन्य (MKO) के मार्गदर्शन में समस्या-समाधान क्षमता' के बीच होता है। 'चान्त्वन' (Scaffolding), जिसे मूल रूप से जेरोम ब्रूनर द्वारा परिभाषित किया गया था, इसी ZPD के अंतर्गत दी जाने वाली वह अस्थायी सहायता है जो बच्चे को कठिन कार्यों को पार करने में सक्षम बनाती है और दक्षता आने पर धीरे-धीरे कम कर दी जाती है। यह प्रक्रिया विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक विकास, सहयोगात्मक अधिगम और स्व-नियमन को बढ़ावा देती है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Cognitive Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित **'अन्वेषण अधिगम या खोज अधिगम' (Discovery Learning)** तथा ज्ञान की तीन निरूपण प्रणालियों—**क्रियात्मक (Enactive), दृश्य-प्रतिमात्मक (Iconic), और प्रतीकात्मक (Symbolic)**—की अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सक्रिय ज्ञान-निर्माण, संरचनात्मक चिंतन और बौद्धिक परिपक्वता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी शिक्षण सिद्धांत' (Humanistic Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सुगमकर्ता या फैसिलिटेटर के रूप में शिक्षक' (Teacher as a Facilitator)**—जिसे उस लोकतांत्रिक और सहानुभूतिपूर्ण शैक्षणिक भूमिका के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षक कक्षा में ज्ञान थोपने वाले या सत्तावादी नियंत्रक के रूप में कार्य करने के बजाय एक ऐसे मार्गदर्शक, सहायक और सुरक्षित मनोवैज्ञानिक वातावरण के प्रस्तोता की भूमिका निभाता है जो शिक्षार्थी की आंतरिक जिज्ञासा, स्वायत्तता और आत्म-निर्देशित अधिगम (Self-Directed Learning) को स्वाभाविक रूप से पोषित और प्रोत्साहित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के भावनात्मक संवर्धन, सार्थक अनुभवात्मक ज्ञान और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'पुनर्बलन अनुसूचियां' (Schedules of Reinforcement—विशेष रूप से 'चर-अनुपात अनुसूची' अर्थात् Variable-Ratio Schedule) तथा 'आकार देना' (Shaping) की अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वांछित व्यवहार के स्थायित्व, विलोपन (Extinction) के प्रतिरोध, और जटिल नवीन कौशलों के क्रमिक अर्जन के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory of Personality) के अंतर्गत प्रतिपादित व्यक्तित्व की संरचना के तीन प्रमुख घटकों—**इदम (Id), अहम् (Ego), और पराहम् (Superego)**—में से 'अहम्' (Ego) की उस केंद्रीय नियामक भूमिका की अवधारणा, जो 'इदम' की पाशविक और तात्कालिक सुख-प्राप्ति की प्राथमिक इच्छाओं तथा 'पर्राहम्' के कठोर, नैतिक और आदर्शवादी दबावों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए **'वास्तविकता के सिद्धांत' (Reality Principle)** के आधार पर मध्यस्थता करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन, संघर्ष समाधान और मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतिरूपण या मॉडलिंग' (Modeling) की प्रक्रिया के भीतर आने वाले 'आत्म-प्रभावी्यता' (Self-Efficacy) के मनोवैज्ञानिक संप्रत्यय—जिसके तहत किसी विशिष्ट कार्य या चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने की अपनी क्षमता के बारे में व्यक्ति का व्यक्तिगत विश्वास और मानसिक आकलन शामिल होता है, जो उसके प्रयासों की मात्रा, दृढ़ता और संकटपूर्ण परिस्थितियों में उसके संज्ञानात्मक व भावनात्मक नियंत्रण को सीधे तौर पर निर्धारित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, शैक्षणिक लचीलेपन और लक्ष्य-प्राप्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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