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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित 'पारस्परिक determinism' (Reciprocal Determinism/त्रिपक्षीय पारस्परिक निर्धारण) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्तिगत कारक (Cognitive/Personal factors), व्यवहार (Behavior), और पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental influences) एक-दूसरे को लगातार प्रभावित करते हैं—तथा 'अवलोकनयात्मक अधिगम' के चार घटकों (ध्यान, धारणा, पुनरुत्पादन और अभिप्रेरणा) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-Regulation), अनुकरण और उच्च-स्तरीय सामाजिक-संज्ञानात्मक विकास के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत में 'त्रिपक्षीय पारस्परिक निर्धारण' (Reciprocal Determinism) यह रेखांकित करता है कि व्यक्ति के आंतरिक कारक (संज्ञानात्मक, भावनात्मक, जैविक), उसका व्यवहार, और बाह्य पर्यावरण—ये तीनों घटक एक-दूसरे को लगातार और गतिक रूप से प्रभावित करते हैं। कक्षा-कक्षीय परिप्रेक्ष्य में, यह अवधारणा दर्शाती है कि विद्यार्थी न केवल पर्यावरण से सीखते हैं (जैसे शिक्षक या साथियों की मॉडलिंग द्वारा), बल्कि अपनी सक्रिय संज्ञानात्मक क्षमताओं और स्व-नियमन (Self-Regulation) के जरिए अपने पर्यावरण और व्यवहार को भी रूपांतरित करते हैं। इसलिए विकल्प (b) इस सिद्धांत के वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक निहितार्थों को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory / Assimilation Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम संगठक' (Advance Organizers) की अवधारणा तथा उसके मनोवैज्ञानिक निहितार्थ—जैसे पूर्व-ज्ञान (Prior Knowledge) के साथ नए संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structures) का एकीकरण (Assimilation), अवपरिवर्तनीय विस्मरण (Obliterative Subsumption), और विभेदी विकास (Progressive Differentiation)—के आधार पर कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की अमूर्त संकल्पनाओं और दीर्घकालिक स्मृति के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित **'अस्तित्ववादी बुद्धि' (Existential Intelligence)** की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्तियों में मानव अस्तित्व के गहनतम प्रश्नों, जैसे कि जीवन का अर्थ क्या है, मृत्यु क्यों होती है, ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई और इस विशाल संसार में हमारा स्थान क्या है, पर विचार करने, उन्हें समझने और दार्शनिक चिंतन करने की उच्च क्षमता होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के दार्शनिक बोध, अमूर्त चिंतन और समग्र मानवीय दृष्टिकोण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'लग्नता/संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'असुरक्षित-प्रतिरोधी संलग्नता' (Insecure-Resistant / Ambivalent Attachment) की अवधारणा—जिसके तहत शिशु प्राथमिक देखभालकर्ता (Caregiver) की अनुपस्थिति में अत्यधिक संकट और चिंता प्रदर्शित करते हैं, तथा देखभालकर्ता के वापस लौटने पर एक साथ निकटता की चाहत और क्रोध/विरोध (Ambivalence) दोनों का जटिल व विरोधाभासी व्यवहार दर्शाते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन (Emotional Regulation), असुरक्षा बोध, और शिक्षक-विद्यार्थी अंतःक्रिया के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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