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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach to Education) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) और 'सुविधाजनक शिक्षण' (Facilitative Teaching) की अवधारणाओं—विशेषकर शिक्षक की एक 'सुविधाकर्ता' (Facilitator) के रूप में भूमिका, सार्थक व प्रासंगिक अधिगम (Significant/Relevant Learning), तथा विद्यार्थी-केंद्रित माहौल (Student-centered Environment)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-बोध (Self-Actualization), संवेगात्मक स्वायत्तता, और आंतरिक प्रेरणा के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) का मानवतावादी अधिगम सिद्धांत 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) और 'सुविधाजनक शिक्षण' (Facilitative Teaching) पर बल देता है। उनके अनुसार, शिक्षा विद्यार्थी-केंद्रित होनी चाहिए जहाँ शिक्षक का मुख्य कार्य ज्ञान थोपना नहीं, बल्कि एक 'सुविधाकर्ता' (Facilitator) के रूप में ऐसा सुरक्षित, सहानुभूतिपूर्ण और सकारात्मक माहौल प्रदान करना है जिससे विद्यार्थी अपनी आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation) और आत्म-सिद्धि (Self-Actualization) की दिशा में आगे बढ़ सकें। जब अधिगम विद्यार्थी के व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों और उद्देश्यों के साथ प्रासंगिक हो जाता है, तभी वह 'सार्थक अधिगम' (Significant Learning) में परिवर्तित होता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, नॉर्मन मंटगोमेरी मूक (Norman L. Munn) एवं जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम शैलियों' (Learning Styles) तथा डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'प्रयोगात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित चार प्रमुख अधिगम शैलियों—अभिसारी (Converging), अपसारी (Diverging), आत्मसात्कारी (Assimilating), और समायोजक (Accommodating)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक विविधताओं, अनुभव-आधारित संकल्पनाओं, और समस्या-समाधान रणनीतियों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem-Solving Learning)**—जिसे उस सर्वोच्च और अंतिम संज्ञानात्मक अधिगम स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी केवल पूर्व नियमों, सिद्धांतों या तथ्यों का स्मरण नहीं करता, बल्कि नए और जटिल संदर्भात्मक नियमों का उपयोग करते हुए अपनी आंतरिक संज्ञानात्मक रणनीतियों (Cognitive Strategies) और तार्किक चिंतन के माध्यम से पूरी तरह से नवीन और अपरिचित समस्याओं का सफल समाधान खोजता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय बौद्धिक विकास, विश्लेषणात्मक क्षमता और स्वतंत्र ज्ञान-अर्जन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अंतरा-वैयक्तिक बुद्धि' (Intrapersonal Intelligence)**—जिसे उस उच्च-स्तरीय मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी स्वयं की भावनाओं, प्रेरणाओं, आंतरिक अनुभूतियों, शक्तियों और कमजोरियों को गहराई से समझने, उनका सटीक आकलन करने और उनके आधार पर अपने जीवन व व्यवहार को निर्देशित व नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-regulation), आत्म-प्रतिबिंब (Self-reflection) और metacognitive विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड कोलब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित चार प्रमुख चरणों—(1) मूर्त अनुभव (Concrete Experience), (2) विचारपूर्ण प्रेक्षण (Reflective Observation), (3) अमूर्त अवधारणा (Abstract Conceptualization), और (4) सक्रिय प्रयोग (Active Experimentation)—तथा उनके द्वारा सुझाए गए चार अधिगम शैलियों (Convergent, Divergent, Assimilant, Accommodant) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की व्यक्तिगत अधिगम प्राथमिकताओं और अनुभवात्मक ज्ञान-निर्माण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी अभिप्रेरणा सिद्धांत' या 'आवश्यकताओं के पदानुक्रम' (Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)**—जिसे उस सर्वोच्च मनोवैज्ञानिक आवश्यकता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी संपूर्ण आंतरिक क्षमताओं, योग्यताओं, सृजनात्मकता और संभावनाओं का पूरी तरह से विकास और उपयोग करते हुए वह सब कुछ बन जाता है जो वह बनने की क्षमता रखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र विकास, आंतरिक अभिप्रेरणा और उच्च-स्तरीय बौद्धिक-सृजनात्मक निष्पादन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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