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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन प्रमुख चिंतन निरूपणों—(1) क्रियात्मक प्रतिनिधित्व (Enactive Representation), (2) दृश्य-प्रतिमात्मक प्रतिनिधित्व (Iconic Representation), और (3) सांकेतिक प्रतिनिधित्व (Symbolic Representation)—तथा 'अन्वेषण अधिगम' (Discovery Learning) की अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के 'सर्पिलाकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) के माध्यम से अमूर्त तार्किक संरचनाओं के निर्माण, भाषा और विचार के समन्वय तथा स्वतंत्र बौद्धिक अन्वेषण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के संज्ञानात्मक विकास और शिक्षण सिद्धांत के अनुसार, विकास तीन चरणों में आगे बढ़ता है: क्रियात्मक (कुकर्मों/गतिविधियों द्वारा), प्रतिमात्मक (चित्रों/मानसिक छवियों द्वारा), और सांकेतिक (भाषा और प्रतीकों द्वारा)। ब्रूनर का प्रसिद्ध कथन है कि किसी भी विषय को किसी भी बच्चे को ईमानदारी से बौद्धिक रूप से प्रभावी ढंग से किसी भी विकासात्मक चरण में सिखाया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने 'सर्पिलाकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) का प्रतिपादन किया, जिसमें जटिल अवधारणाओं को पहले सरल और मूर्त रूप में (क्रियात्मक/प्रतिमात्मक) और फिर अधिक परिष्कृत और अमूर्त रूप में (सांकेतिक) बार-बार पढ़ाया जाता है। 'अन्वेषण अधिगम' (Discovery Learning) विद्यार्थियों को स्वयं तथ्यों और नियमों की खोज करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे उनकी संज्ञानात्मक स्वायत्तता और समस्या-समाधान क्षमता विकसित होती है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कर्ट लेविन (Kurt Lewin) के 'क्षेत्र सिद्धांत' (Field Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'जीवन स्पेस' (Life Space) की संकल्पना तथा अधिगम प्रक्रिया में विभिन्न प्रकार के मनोवैज्ञानिक संघर्षों—जैसे कि 'गम-गम संघर्ष' (Approach-Approach Conflict), 'परिहार-परिहार संघर्ष' (Avoidance-Avoidance Conflict), और 'गम-परिहार संघर्ष' (Approach-Avoidance Conflict)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ तथा कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थी के व्यवहार एवं निर्णय लेने की प्रक्रिया पर इनके प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रकृतिवादी बुद्धि' (Naturalistic Intelligence) तथा 'अस्तित्ववादी बुद्धि' (Existential Intelligence) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता, जैव-विविधता के प्रति बोध, और मानव अस्तित्व के दार्शनिक प्रश्नों के अन्वेषण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'करके सीखना' (Learning by Doing / Experiential Learning)**—जिसे उस व्यावहारिक शिक्षाशास्त्रीय उपागम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत विद्यार्थी केवल निष्क्रिय रूप से श्रोता बनकर या पाठ्यपुस्तकों को रटकर ज्ञान प्राप्त नहीं करते, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों, सामूहिक परियोजनाओं, क्षेत्र-कार्यों और समस्याओं के समाधान में सक्रिय रूप से भाग लेकर अपने अनुभवों के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यावहारिक संज्ञान, लोकतांत्रिक सहभागिता और आलोचनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर (Post-Conventional Morality Level) के द्वितीय चरण यानी **'सार्वभौमिक नैतिक अंतःचेतना का अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation - Stage 6)**—जिसके तहत व्यक्ति बाहरी सामाजिक कानूनों या समझौतों से ऊपर उठकर अपने स्वयं के अंतःकरण, सार्वभौमिक न्याय के सिद्धांतों, मानवाधिकारों और व्यक्तिगत विवेक के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, भले ही वे कानून के विरोध में क्यों न हों—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक नैतिक चिंतन, लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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