त्वरित लिंक्स
MPTET
5 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Theory of Cognitive Growth and Discovery Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित ज्ञान के तीन निरूपण रूपों—'क्रियात्मक निरूपण' (Enactive Representation), 'प्रतिबिम्बात्मक निरूपण' (Iconic Representation), और 'प्रतीकात्मक निरूपण' (Symbolic Representation)—के तार्किक क्रमिक विकास और कक्षा-कक्ष शिक्षण में 'सर्पिल पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) की संकल्पना के व्यावहारिक अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, बच्चे दुनिया को समझने के लिए तीन प्रमुख निरूपण प्रणालियों का उपयोग करते हैं: 1. क्रियात्मक निरूपण (Enactive - लगभग 0-1 वर्ष, शारीरिक क्रियाओं और मोटर कौशल द्वारा), 2. प्रतिबिम्बात्मक निरूपण (Iconic - लगभग 1-6 वर्ष, मानसिक छवियों और चित्रों द्वारा), और 3. प्रतीकात्मक निरूपण (Symbolic - 7 वर्ष से आगे, भाषा, तर्क और अमूर्त प्रतीकों द्वारा)। ब्रूनर का 'सर्पिल पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) इस बात पर जोर देता है कि किसी भी विषय को किसी भी विकासात्मक स्तर पर एक बौद्धिक रूप से ईमानदार रूप में सिखाया जा सकता है, जहाँ जटिल विषयों को सरल रूपों में शुरू करके क्रमिक रूप से अधिक उन्नत और गहरे स्तर पर बार-बार पढ़ाया जाता है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory / Assimilation Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रगामी संगठक या एडवांस ऑर्गेनाइज़र' (Advance Organizer)**—जिसे उस प्रारंभिक शिक्षण सामग्री या वैचारिक ढांचे के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे शिक्षक किसी नवीन, व्यापक और अमूर्त विषय-वस्तु को पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत करता है, ताकि यह नया ढांचा विद्यार्थियों के मस्तिष्क में पहले से मौजूद प्रासंगिक ज्ञान (Previous Cognitive Structure) और नए ज्ञान के बीच एक तार्किक सेतु का काम कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अर्थपूर्ण ज्ञान-सर्जन (Meaningful Learning), संज्ञानात्मक एकीकरण और उच्च-स्तरीय स्कीमा निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) और विलियम किलपैट्रिक (William Kilpatrick) के 'प्रगतिशील शिक्षा और प्रोजेक्ट पद्धति' (Progressive Education and Project Method) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सामाजिक अनुभव और आनुभाविक अधिगम' (Social Experience and Experiential Learning)**—जिसे उस व्यावहारिक शिक्षाशास्त्रीय दृष्टिकोण के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत ज्ञान केवल पुस्तकों से रटकर प्राप्त नहीं किया जाता, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों, सामाजिक अंतःक्रियाओं और प्रयोजनमूलक (Purposeful) गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेकर स्व-अनुभव के माध्यम से निर्मित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक मूल्यों, व्यावहारिक समस्या-समाधान और सहयोगात्मक ज्ञान-सर्जन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के पदानुक्रम सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च और अंतिम अधिगम प्रकार—**'समस्या समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning)**—जिसके तहत शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और कौशलों का उपयोग करते हुए एक नवीन, जटिल और अनसुलझी स्थिति या बौद्धिक समस्या का तार्किक, विश्लेषणात्मक और सृजनात्मक समाधान खोजता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास, स्वायत्त बौद्धिक संचालन और आलोचनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत' (Humanistic Theory of Motivation / Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आवश्यकताओं के पदानुक्रम' (Deficiency Needs vs. Growth Needs) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ—विशेषकर 'न्यूनता संबंधी आवश्यकताएं' (D-Needs जैसे दैहिक व सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं) और 'विकास संबंधी आवश्यकताएं' (B-Needs जैसे आत्म-सिद्धि या Self-Actualization)—एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक अभिप्रेरणा, संवेगात्मक सुरक्षा, और समग्र व्यक्तित्व विकास के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के संबंधवाद सिद्धांत' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मुख्य नियम—**'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ जब कोई तंत्रिका पथ (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे ऐसा करने दिया जाता है, तो इससे व्यक्ति को संतुष्टि मिलती है और यदि उसे तैयार होने पर भी कार्य करने से रोका जाता है, तो इससे उसे झुंझलाहट या असंतोष होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की मानसिक तैयारी, अभिप्रेरणा और अधिगम पठार (Learning Plateau) के निवारण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.