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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के विशेष संदर्भ में, 'राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005' (NCF 2005) तथा 'निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009' (RTE Act 2009) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों' (Children with Special Needs - CWSN) के लिए किस विशिष्ट शैक्षिक उपागम (Educational Approach) की वकालत की गई है, जो उनके संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को एक साथ सुनिश्चित करता है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास और शिक्षाशास्त्र भाग के अंतर्गत समावेशी शिक्षा का यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है। 'समावेशन' (Inclusion) का मूल आधार यह है कि शिक्षा प्रणाली (विद्यालय, शिक्षक, पाठ्यक्रम और मूल्यांकन पद्धति) बालक के अनुकूल बने, न कि बालक शिक्षा प्रणाली के अनुकूल बनने के लिए संघर्ष करे। NCF 2005 और RTE Act 2009 दोनों ही इस बात पर बल देते हैं कि सामान्य विद्यालयों में सभी पृष्ठभूमियों और क्षमताओं वाले बच्चों को एक साथ शिक्षा दी जाए जिससे 'समावेशी संस्कृति' का निर्माण हो सके। अतः विकल्प (c) सबसे अधिक सटीक और वैज्ञानिक रूप से मान्य उत्तर है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास' (Social Contract and Individual Rights Orientation)**—जिसे उस उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता (Post-conventional Morality) की चरण-वस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति यह मानता है कि कानून और नियम कठोर और अपरिवर्तनीय नहीं हैं, बल्कि वे समाज के बहुमत द्वारा आपसी सहमति से बनाए गए एक 'सामाजिक अनुबंध' (Social Contract) हैं, और यदि कोई कानून या नियम किसी व्यक्ति के मौलिक मानवाधिकारों या समाज के कल्याण के विरुद्ध कार्य करता है, तो उसे तार्किक और लोकतांत्रिक तरीकों से बदला जाना चाहिए—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक मूल्यों, आलोचनात्मक नैतिक चिंतन और न्यायपरायणता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रकृतिवादी बुद्धि' (Naturalist Intelligence) की अवधारणा—जिसके तहत जीवों, वनस्पतियों, पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक पर्यावरण की सूक्ष्म विविधताओं को पहचानने, वर्गीकृत करने और उनके साथ सफलतापूर्वक तालमेल बिठाने की विशिष्ट क्षमता शामिल होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, अनुभवात्मक क्षेत्र-अध्ययन और समग्र संज्ञानात्मक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) एवं 'व्यंजक शिक्षण सिद्धांत' (Experiential Learning Theory) के अंतर्गत 'सार्थक अधिगम' (Significant Learning) की अवधारणा और शिक्षक की 'सुगमकर्ता' (Facilitator) की भूमिका के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित व्यक्तित्व की संरचनात्मक प्रणाली के एक महत्वपूर्ण घटक—**'अहम्' (Ego)**—जो वास्तविकता के सिद्धांत (Reality Principle) पर कार्य करता है, सुखवादी 'इदम' (Id) की आवेगी माँगों और कठोर नैतिक 'पराअहम्' (Super-ego) के बीच संतुलन स्थापित करते हुए बाहरी वास्तविक दुनिया के साथ समायोजन बैठाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन, तार्किक निर्णय लेने की क्षमता और आवेग नियंत्रण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'अवलोकनात्मक अधिगम' (Observational Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की अवधारणा—जिसके तहत किसी विशिष्ट कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने की अपनी क्षमता के बारे में व्यक्ति का व्यक्तिगत विश्वास उसके प्रेरणा स्तर, प्रयास, और चुनौतियों के सामने टिके रहने की क्षमता को प्रत्यक्ष रूप से संचालित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, शैक्षणिक प्रेरणा, और लक्ष्य-प्राप्ति के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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