त्वरित लिंक्स
UPTET
5 views
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, पियाजे द्वारा प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: अमूर्त चिंतन, परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क और मेटाकॉग्निशन) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'पृष्ठपार्श्वीय प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - DLPFC: कार्यशील स्मृति, रणनीतिक योजना और अमूर्त तार्किकता), 'पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex - ACC: त्रुटि संसूचन, संज्ञानात्मक नियंत्रण और संघर्ष समाधान), तथा 'पैरिएटल-टेम्पोरल एसोसिएशन कॉर्टेक्स' (Parietal-Temporal Association Cortex - बहु-संवेदी सूचनाओं का एकीकरण और जटिल वैचारिक संरचना) के बीच परिपक्व व्हाइट मैटर ट्रैक्ट्स, डिस्ट्रीब्यूटेड कॉर्टिकल नेटवर्क्स के उच्च-क्रम सिंक्रोनाइजेशन, और सिनैप्टिक प्रूनिंग के अंतिम चरण की सक्रियण गतिकी, तथा डेविड एलकाइंड के 'किशोरावस्था की अहंकेंद्रिता' (Adolescent Egocentrism) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-फॉर्मल ऑपरेशनल ऑप्टिमाइज्ड मेटाकॉग्निटिव पेडागोजी' (Neuro-Formal Operational Optimized Metacognitive Pedagogy) और विद्यार्थियों में परिकल्पनात्मक तार्किकता, समस्या-समाधान क्षमता व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) अमूर्त चिंतन, परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-deductive reasoning) और मेटाकॉग्निशन की विशेषता है। न्यूरो-संज्ञानात्मक रूप से, यह अवस्था मस्तिष्क के पृष्ठपार्श्वीय प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (DLPFC), पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स (ACC) और व्हाइट मैटर ट्रैक्ट्स के परिपक्व होने तथा डिस्ट्रीब्यूटेड कॉर्टिकल नेटवर्क्स के उच्च-क्रम सिंक्रोनाइजेशन से जुड़ी होती है। यह न्यूरो-बायोलॉजिकल परिपक्वता विद्यार्थियों को जटिल तार्किक समस्याओं को हल करने और मेटाकॉग्निटिव रणनीतियों का उपयोग करने में सक्षम बनाती है, जो समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण (Metacognitive Pedagogy) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Related Questions
→
उत्तर प्रदेश की प्रमुख झीलों, तालों और उनकी अवस्थिति (जनपद) के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. बखीरा झील - संत कबीर नगर (यह एक प्रसिद्ध रामसर स्थल भी है)
2. कीठम झील (सूर सरोवर) - आगरा
3. फुलहर झील - पीलीभीत (इसी झील से गोमती नदी का उद्गम होता है)
4. दरवन झील - अयोध्या
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
→
प्राचीन भारतीय दर्शन प्रणालियों, उनके प्रणेताओं और मूल सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. न्याय दर्शन - महर्षि गौतम (तर्क, प्रमाण और प्रत्यक्ष-अनुमान आधारित यथार्थवादी ज्ञान)
2. वैशेषिक दर्शन - महर्षि कणाद (परमाणुवाद और पदार्थों के षड्धर्मों का सिद्धांत)
3. सांख्य दर्शन - महर्षि पतंजलि (पुरुष और प्रकृति के संयोग से सृष्टि की उत्पत्ति और योग का प्रतिपादन)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन सा/से सही सुमेलित है/हैं?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम पठार और मानसिक थकान' के संदर्भ में, आर्थर गेट्स (Arthur Gates) और रसेल (Russell) द्वारा विश्लेषित 'अधिगम के पठार' (Plateaus in Learning) के अंतर्गत 'प्रेरणा की कमी', 'गलत शिक्षण विधियों', और 'शारीरिक-मानसिक थकान' (Physiological & Mental Fatigue) के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा विलियम मैकडगल (William McDougall) द्वारा प्रतिपादित 'मूलप्रवृत्तियों का सिद्धांत' (Instinct Theory) के अंतर्गत 'संवेगों और मूलप्रवृत्तियों' (जैसे भय और पलायन) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, उपचारात्मक शिक्षण चक्र (Remedial Teaching Cycle) और विद्यार्थियों में संचयी अधिगम अवरोधों को दूर करने में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
हिंदी भाषा शिक्षण और व्याकरण के अंतर्गत 'वाक्य विश्लेषण' (Sentence Analysis) करते समय, निम्नलिखित में से कौन सा घटक 'उद्देश्य' (Subject) के अंतर्गत मुख्य रूप से शामिल किया जाता है?
→
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक संस्कृति के संदर्भ में, 'वेदांग' (Vedangas) के अंतर्गत आने वाले छह अंगों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वेदांगों की कुल संख्या छह है, जिनका मुख्य उद्देश्य वेदों के सही उच्चारण, उनके अर्थ को समझने और वैदिक अनुष्ठानों को विधिपूर्वक संपन्न कराने में सहायता करना है, जिन्हें 'वेदों के अंग' कहा जाता है।
2. इन छह वेदांगों में 'शिक्षा' (ध्वनि शास्त्र), 'कल्प' (अनुष्ठान विधि), 'व्याकरण' (शब्द-उत्पत्ति शास्त्र), 'निरुक्त' (शब्दार्थ विज्ञान), 'छंद' (काव्य माप), और 'ज्योतिष' (खगोल विज्ञान) शामिल हैं।
3. 'निरुक्त' के सबसे प्रसिद्ध रचयिता महर्षि पाणिनि हैं, जिन्हें संस्कृत व्याकरण का जनक माना जाता है, जबकि 'व्याकरण' के क्षेत्र में यास्क का 'निरुक्त' ग्रंथ सर्वोच्च माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.