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Indian Polity
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) का प्रावधान है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 360 के तहत राष्ट्रपति वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा होने पर वित्तीय आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 1955 के विभिन्न आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 8 भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों (PIOs) के नागरिकता के अधिकारों से संबंधित है, जिसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी में से कोई भी अविभाजित भारत में पैदा हुआ था, तो वह भारत का नागरिक माना जाएगा, बशर्ते उसने भारत के राजनयिक या कौंसुलरी प्रतिनिधि के पास पंजीकरण करा लिया हो, चाहे संविधान लागू होने से पहले या उसके पश्चात। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'देशीकरण द्वारा' (By Naturalization) नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि आवेदक किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय नागरिकों को देशीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया हो, तथा उसे भारत में कम से कम 12 वर्षों तक सामान्य रूप से निवास करना अनिवार्य होता है। 3. नागरिकता अधिनियम, 1955 (समय-समय पर संशोधित) के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता 'वंचना द्वारा' (By Deprivation) समाप्त कर दी जाती है, जिसकी घोषणा केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित करके की जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को लोकहित में अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् को राज्यों के बीच उत्पन्न किसी विवाद की सुनवाई करने और उस पर अंतिम न्यायिक निर्णय देने की पूर्ण न्यायिक अधिकारिता (Jurisdiction) प्राप्त होती है। 2. पुंछी आयोग (Punchhi Commission) की संस्तुति के आधार पर अंतर-राज्यीय परिषद् को एक स्थायी निकाय के रूप में वर्ष 1990 में स्थापित किया गया था, और प्रधानमंत्री इस परिषद् के अध्यक्ष होते हैं, जबकि सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके स्थायी सदस्य होते हैं। 3. संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) एक अर्ध-न्यायिक निकाय है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण तथा राज्यों को दी जाने वाली सहायता-अनुदान के सिद्धांतों के संबंध में राष्ट्रपति को अपनी संस्तुतियाँ प्रस्तुत करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 67(b) के अनुसार उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है जिसे राज्य सभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत ने पारित किया हो और जिससे लोकसभा सहमत हो, किंतु इस प्रकार का कोई भी प्रस्ताव तब तक प्रस्तुत नहीं किया जा सकता जब तक कि इस आशय के प्रस्ताव की कम से कम चौदह दिन की पूर्व सूचना न दी गई हो। 2. अनुच्छेद 75(1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के पश्चात प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 3. सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि मंत्रिमंडल का कोई भी निर्णय यदि संसद के किसी एक सदन में भी अस्वीकृत हो जाए, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत का प्रथम नागरिक? भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) और क्षमादान की शक्तियों (अनुच्छेद 72) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 123 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति का विस्तार केवल उन्हीं विषयों पर है जिन पर कानून बनाने की शक्ति संसद को प्राप्त है, तथा राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश का वही बल और प्रभाव होता है जो संसद के किसी अधिनियम का होता है, बशर्ते इसे संसद की पुनर्बैठक के बाद छह सप्ताह के भीतर दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित न किए जाने पर यह स्वतः समाप्त हो जाए। 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'डေकूपर वाद (1970)' में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया था कि राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूर्णतः बाहर है, और राष्ट्रपति इस बात का एकमात्र और अंतिम निर्णायक है कि ऐसी परिस्थितियों का अस्तित्व है जिनके कारण तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है। 3. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, और इस न्यायिक/कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग के अंतर्गत राष्ट्रपति को मार्शल लॉ (सैन्य विधि) के तहत दिए गए मृत्युदंड के मामलों में भी क्षमादान देने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, जिस पर न्यायालय द्वारा कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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