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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'भाषा विकास और विचार' (Language Development and Thought) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) द्वारा प्रतिपादित ' sociocultural theory of cognitive development' के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ब्रोका क्षेत्र' (Broca's Area), 'वेर्निके क्षेत्र' (Wernicke's Area), और 'आर्क्युएट फेसिकुलस' (Arcuate Fasciculus) के बीच भाषाई प्रसंस्करण, सामाजिक-सांस्कृतिक मध्यस्थता, और आंतरिक वाक् (Inner Speech) की सक्रियण गतिकी, तथा जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'अहंप्रतिभावी वाक्' (Egocentric Speech) व भाषा-विचार संबंध मॉडल के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-लिंग्विस्टिक ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Linguistic Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning), ज़ोन ऑफ़ प्रॉक्सिमाल डेवलपमेंट (ZPD) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के अनुसार, भाषा संज्ञानात्मक विकास का मुख्य चालक है। यह पहले सामाजिक वाक् (Social Speech) के रूप में प्रकट होती है, फिर निजी वाक् (Private Speech) और अंततः आंतरिक वाक् (Inner Speech) में बदलती है जो विचारों को विनियमित करती है। न्यूरोलॉजिकल स्तर पर, वाक् उत्पादन के लिए 'ब्रोका क्षेत्र' (Broca's Area), भाषा बोध के लिए 'वेर्निके क्षेत्र' (Wernicke's Area), और इन दोनों को जोड़ने वाले तंत्रिका तंतु 'आर्क्युएट फेसिकुलस' (Arcuate Fasciculus) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में इस न्यूरो-लिंग्विस्टिक समझ का उपयोग करके सहयोगात्मक शिक्षण और ZPD (Zone of Proximal Development) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाता है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'हिंदी भाषा एवं व्याकरण' के अंतर्गत 'कारक और उनके विभक्ति चिह्नों' के सूक्ष्म व्याकरणिक विश्लेषण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा वाक्य 'अपादान कारक' (जहाँ अलगाव, डर, तुलना, सीखने या लजाने का भाव हो) और 'करण कारक' (जहाँ साधन या माध्यम का बोध हो) के बीच के अंतर को सर्वोत्तम और व्याकरणिक दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध रूप में स्पष्ट करता है? पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम के अंतर्गत 'पारिस्थितिक अनुक्रमण' (Ecological Succession) और 'क्लाइमैक्स कम्युनिटी' (Climax Community) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्राथमिक अनुक्रमण (Primary Succession) वहाँ प्रारंभ होता है जहाँ पहले से कोई जीवित जीव या उपजाऊ मिट्टी नहीं होती है, जैसे कि नग्न चट्टान, नव-निर्मित लावा क्षेत्र या रेत के टीले, और इसमें 'पायनियर स्पीशीज' (Pioneer Species) के रूप में प्रायः लाइकेन (Lichens) या काई (Mosses) का आगमन होता है। 2. द्वितीयक अनुक्रमण (Secondary Succession) किसी ऐसे क्षेत्र में प्रारंभ होता है जहाँ पहले से जीवन मौजूद था लेकिन प्राकृतिक आपदा (जैसे दावानल, बाढ़) या मानवीय गतिविधियों (जैसे वनों की कटाई) के कारण वह नष्ट हो गया है, और यह प्राथमिक अनुक्रमण की तुलना में बहुत धीमी गति से चलता है क्योंकि इसमें मिट्टी का निर्माण शून्य से शुरू करना पड़ता है। 3. अनुक्रमण की अंतिम अवस्था में बनने वाले समुदाय को 'चरम समुदाय' या 'क्लाइमैक्स कम्युनिटी' (Climax Community) कहा जाता है, जो अपने पर्यावरण के साथ पूर्ण संतुलन में होता है और जब तक कोई बड़ी पर्यावरणीय बाधा न आए, यह स्थिर बना रहता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए: 1. इस अवस्था में बालकों के भीतर 'संरक्षण' (Conservation) का गुण विकसित हो जाता है, जिससे वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के रूप, आकार या रंग में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन या द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है। 2. बच्चे वस्तुओं को उनके किसी एक गुण (जैसे केवल रंग या केवल आकार) के आधार पर वर्गीकृत करने की बजाय कई मानदंडों के आधार पर एक साथ छाँट सकते हैं, जिसे 'वर्गीकरण' (Classification) की क्षमता कहा जाता है। 3. इस अवस्था के दौरान बालक पूरी तरह से 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) और 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' में पारंगत हो जाते हैं, और उन्हें अपने तर्कों की पुष्टि के लिए प्रत्यक्ष या भौतिक रूप से सामने मौजूद वस्तुओं की कोई आवश्यकता नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, खनिज संपदा और ऊर्जा संसाधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में 'चूना पत्थर', 'डोलमाइट', 'कोयला' और 'नॉन-प्लास्टिक फायर क्ले' जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, और यह राज्य का एकमात्र प्रमुख खनिज-बहुल जिला है। 2. उत्तर प्रदेश में 'रिहंद बांध परियोजना' सोनभद्र जिले के पिपरी नामक स्थान पर रिहंद नदी (जो कि सोन नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है) पर बनाई गई है, जिससे राज्य में जलविद्युत का उत्पादन होता है। 3. राज्य में खनिज विकास और इसके वैज्ञानिक दोहन को बढ़ावा देने के लिए 'उत्तर प्रदेश राज्य खनिज विकास निगम' की स्थापना वर्ष 1974 में की गई थी, तथा राज्य की प्रथम खनिज नीति वर्ष 1998 में घोषित की गई थी जिसके तहत खनिज बहुल जिलों को 'औद्योगिक क्षेत्र' घोषित किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमताओं और सुधारात्मक शिक्षण' के संदर्भ में, कर्ट लेविन (Kurt Lewin) द्वारा प्रतिपादित 'क्षेत्र सिद्धांत' (Field Theory) के अंतर्गत 'जीवन स्थान' (Life Space) और 'टोपोलॉजी' (Topology) की संकल्पनाओं के मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा हर्बर्ट वाल्टन और रिचर्ड श्लाव द्वारा विकसित एवं डेविड ऑसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) में वर्णित 'अग्रिम आयोजक' (Advance Organizer) मॉडल के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, संज्ञान-आधारित सुधारात्मक अनुदेशन (Cognitive Remedial Instruction) और विद्यार्थियों में अधिगम संबंधी बाधाओं के न्यूनीकरण में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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