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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'स्मृति के बहु-भंडार मॉडल (Multi-Store Model of Memory)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, रिचर्ड एटकिंसन (Richard Atkinson) और रिचर्ड शिफ्रिन (Richard Shiffrin) द्वारा प्रतिपादित 'संवेदी स्मृति, अल्पकालिक स्मृति और दीर्घकालिक स्मृति' के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'संवेदी कॉर्टेक्स', 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' और 'हिप्पोकैम्पस' के बीच सूचना संकेतिकरण (Encoding), रखरखाव रिहर्सल (Maintenance Rehearsal), और समेकन (Consolidation) की सक्रियण गतिकी, तथा एलन बैडली (Alan Baddeley) और ग्राहम हिच (Graham Hitch) के 'कार्यशील स्मृति मॉडल' (Working Memory Model: सेंट्रल एक्जीक्यूटिव, फोनोलॉजिकल लूप, विजुअल-स्पेशियल स्केचपैड और एपिसोडिक बफर) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, कॉग्निटिव-लोड सिंक्रनाइज़्ड पेडागोजी (Cognitive-Load Synchronized Pedagogy) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक धारिता, कार्यकारी नियंत्रण व समग्र सूचना प्रसंस्करण क्षमता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

व्याख्या: एटकिंसन-शिफ्रिन मॉडल और बैडली-हिच के कार्यशील स्मृति मॉडल का न्यूरो-संज्ञानात्मक एकीकरण यह स्पष्ट करता है कि अल्पकालिक/कार्यशील स्मृति (प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स द्वारा नियंत्रित) से सूचनाओं का दीर्घकालिक स्मृति (हिप्पोकैम्पस पर निर्भर) में सफल स्थानांतरण और समेकन तभी संभव है जब 'सेंट्रल एक्जीक्यूटिव' और बहु-संवेदी घटक (फोनोलॉजिकल लूप व विजुअल-स्पेशियल स्केचपैड) ठीक से कार्य करें। प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में शिक्षकों को 'Cognitive Load Theory' का उपयोग करके बच्चों की कार्यशील स्मृति क्षमता के अनुसार शिक्षण सामग्री को खंडों (Chunking) में विभाजित करना चाहिए ताकि अधिगम प्रभावी और दीर्घकालिक हो सके।
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