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Indian Polity
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राष्ट्रपति का 'अध्यादेश जारी करने की शक्ति' (Ordinance Power) किस अनुच्छेद में वर्णित है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति तब अध्यादेश जारी कर सकते हैं जब संसद का सत्र न चल रहा हो।
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा में इसे अस्वीकार करने या इसमें संशोधन करने की शक्ति का पूर्ण अभाव होता है, तथा राज्यसभा इस विधेयक को अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिश के लोकसभा को वापस लौटाने के लिए बाध्य होती है। 2. संविधान के अनुच्छेद 117 के खंड (3) के अंतर्गत ऐसे वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-II), जिनमें भारत की संचित निधि से व्यय करने का उपबंध होता है, संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किए जा सकते हैं, किंतु राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना इन्हें संसद द्वारा पारित नहीं किया जा सकता है। 3. अनुच्छेद 108 के प्रावधानों के अनुसार दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) केवल साधारण विधेयकों और वित्तीय विधेयकों (Category-I) के संदर्भ में बुलाई जा सकती है, किंतु धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) के मामले में संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त (Termination) हो जाएगी, और यह नियम युद्ध काल या शांति काल दोनों ही परिस्थितियों में समान रूप से लागू होता है। 2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'देशीयकरण' (Naturalization) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि आवेदक किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय नागरिकों को देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया हो। 3. संसद को संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत यह अनन्य शक्ति प्राप्त है कि वह नागरिकता के अर्جين और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि का विनियमन कर सकती है, किंतु इस शक्ति के प्रयोग के माध्यम से संसद किसी भी व्यक्ति को मौलिक अधिकारों की तरह भू-तक्षी (Retrospective) प्रभाव से नागरिकता से वंचित नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और वित्तीय विधेयकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 117 के खंड (1) के अंतर्गत ऐसा कोई भी वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-I), जिसमें अनुच्छेद 110 में उल्लिखित मामलों के साथ-साथ अन्य विषय भी शामिल हों, राज्यसभा में पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता है और उसे केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, तथा इसे राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता है। 2. अनुच्छेद 117 के खंड (3) के अधीन आने वाले वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-II), जो केवल भारत की संचित निधि से व्यय आकर्षित करते हैं, को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है, किंतु राष्ट्रपति की संस्तुति के बिना संसद का कोई भी सदन ऐसे विधेयक को पारित नहीं कर सकता है। 3. लोकसभा द्वारा पारित किसी साधारण विधेयक या वित्तीय विधेयक के संबंध में दोनों सदनों के बीच गतिरोध उत्पन्न होने पर राष्ट्रपति अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक (Joint Sitting) आहूत कर सकता है, और इस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता अनिवार्य रूप से राज्यसभा के सभापति द्वारा की जाती है, जिनका पद देश के उपराष्ट्रपति के पास होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के गठन, संरचना और उनके कामकाज के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-B के अनुसार प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु 20 लाख से कम आबादी वाले छोटे राज्यों के लिए यह छूट दी गई है कि वे मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन न करें। 2. अनुच्छेद 243-C के प्रावधानों के तहत पंचायतों के सभी स्तरों के सदस्यों का प्रत्यक्ष निर्वाचन सीधे जनता द्वारा किया जाता है, जबकि मध्यवर्ती और जिला स्तरों पर पंचायतों के अध्यक्षों का निर्वाचन उन स्तरों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। 3. राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) का गठन अनुच्छेद 243-I के तहत प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर राज्यपाल द्वारा किया जाता है, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और करों, शुल्कों तथा टोल के निर्धारण के संबंध में राज्यपाल को अपनी संस्तुतियाँ देता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्य विधानमंडल के अंतर्गत 'विधानसभा' (Legislative Assembly) और 'विधान परिषद' (Legislative Council) की संरचना, गठन तथा उनकी विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उसकी समाप्ति के लिए कानून बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दे। 2. विधान परिषद के कुल सदस्यों की संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद में सदस्यों की न्यूनतम संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए, हालांकि इसके कुछ ऐतिहासिक अपवाद (जैसे जम्मू-कश्मीर विधान परिषद जब वह अस्तित्व में थी) भी रहे हैं। 3. विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा किया जाता है, जिसमें 1/3 सदस्य स्थानीय निकायों द्वारा, 1/12 सदस्य स्नातकों द्वारा और 1/12 सदस्य अध्यापकों द्वारा चुने जाते हैं, जबकि राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों में से कुल सदस्यों के 1/6 भाग का मनोनयन किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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