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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमताओं और विकासात्मक विकारों के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक आकलन' के संदर्भ में, 'पठन वैकल्य' (Dyslexia) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'बाएं गोलार्ध के पश्च-टेम्पोरल और ऑक्सीपिटो-टेम्पोरल कॉर्टेक्स' (Left Temporo-Parietal and Occipito-Temporal Cortex) की दृश्य-शब्द रूप पहचान (Visual Word Form Recognition) और ध्वन्यात्मक प्रसंस्करण (Phonological Processing) विफलता की प्रक्रिया, तथा शेलविरा (Sally Shaywitz) द्वारा प्रतिपादित 'डिस्लेक्सिया के न्यूरोबायोलॉजिकल मॉडल' के अंतर्गत 'ध्वन्यात्मक मार्ग' और 'दृश्य मार्ग' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, बहुसंवेदी ऑर्टन-गिर्लिंगहैम (Orton-Gillingham) पद्धति के अनुकूलित अनुप्रयोग और विद्यार्थियों में पठन दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

पठन वैकल्य (Dyslexia) एक विशिष्ट पठन विकार है जो मुख्य रूप से मस्तिष्क के बाएं गोलार्ध के टेम्पोरो-पैरिटल और ऑक्सीपिटो-टेम्पोरल क्षेत्रों में ध्वन्यात्मक प्रसंस्करण (Phonological Processing) और दृश्य-शब्द रूप पहचान की विफलता के कारण होता है। सैली शैलेविरा (Sally Shaywitz) के न्यूरोबायोलॉजिकल मॉडल के अनुसार, इन बच्चों में तंत्रिकाकीय मार्ग बाधित होते हैं। इसके निवारण के लिए 'ऑर्टन-गिर्लिंगहैम' जैसी बहुसंवेदी शिक्षण पद्धतियों का उपयोग किया जाता है जो ध्वनियों (Phonemes) को दृश्य और स्पर्श अनुभवों के साथ जोड़कर पठन दक्षता का संवर्धन करती हैं।
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