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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के क्षेत्र-आधारित और प्रज्ञावादी सिद्धांतों' के संदर्भ में, कर्ट लेविन (Kurt Lewin) द्वारा प्रतिपादित 'क्षेत्र सिद्धांत' (Field Theory) के अंतर्गत 'जीवन अंतरिक्ष' (Life Space), 'टोपोलॉजी' (Topology), और 'अवरोध व विक्षेप' (Barriers & Valence) के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा एडवर्ड टोलमैन (Edward Tolman) द्वारा प्रतिपादित 'चिह्न अधिगम या प्रयोजनवादी व्यवहारवाद' (Sign-Gestalt / Purposive Behaviorism) के अंतर्गत 'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map) और 'अव्यक्त अधिगम' (Latent Learning) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान के स्थानिक उन्मुखीकरण और विद्यार्थियों में उद्देश्यपूर्ण व स्वायत्त ज्ञानार्जन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

कर्ट लेविन का 'क्षेत्र सिद्धांत' (Field Theory) यह बताता है कि व्यवहार व्यक्ति और उसके मनोवैज्ञानिक पर्यावरण (जिसे 'जीवन अंतरिक्ष' कहा जाता है) के बीच की अंतःक्रिया का परिणाम है। वहीं, एडवर्ड टोलमैन का 'प्रयोजनवादी व्यवहारवाद या चिह्न अधिगम सिद्धांत' यह सिद्ध करता है कि जीव अपने पर्यावरण के 'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map) का निर्माण करते हैं और 'अव्यक्त अधिगम' (Latent Learning) के माध्यम से बिना प्रत्यक्ष पुरस्कार के भी ज्ञान को आंतरिक रूप से आत्मसात करते हैं। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में इन दोनों सिद्धांतों का संयुक्त उपयोग शिक्षकों को ऐसा सुलभ और लचीला वातावरण प्रदान करने में मदद करता है जहाँ छात्र बाह्य दबावों के बिना स्वतंत्र रूप से अपने संज्ञानात्मक ढांचे को विकसित कर सकें।
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