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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम पठार (Plateaus of Learning) और मानसिक थकान' के संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) द्वारा प्रतिपादित 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत आने वाले सीमांत अवरोधों, तथा ब्रायन और हार्ter (Bryan & Harter) द्वारा प्रतिपादित 'अधिगम पठार के निर्माण के प्रमुख कारणों'—जैसे रुचि की कमी, प्रेरणा का अभाव, जटिल विषय-वस्तु, शारीरिक या मानसिक थकान, और अनुचित शिक्षण विधि—के वैज्ञानिक स्वरूप के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) कक्षा-कक्ष प्रबंधन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

ब्रायन और हार्ter (Bryan & Harter) ने अधिगम पठार (Plateaus of Learning) की संकल्पना को स्पष्ट करते हुए बताया कि जब सीखने की प्रक्रिया में कुछ समय के लिए प्रगति रुक जाती है और वक्र एक सीधी क्षैतिज रेखा बना लेता है, तो उसे पठार कहते हैं। इसके प्रमुख कारणों में थकान, प्रेरणा की कमी, और पुरानी शिक्षण विधियाँ शामिल हैं। इसके निवारण के लिए उपचारात्मक शिक्षण, विधियों में बदलाव और उचित अभिप्रेरण का उपयोग किया जाता है। अतः विकल्प 'b' सर्वाधिक उपयुक्त और सत्य है।
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए: 1. इस अवस्था में बालकों में 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है, जिससे वे बिना किसी दृश्य या मूर्त सामग्री के केवल प्रतीकों, विचारों और परिकल्पनाओं के आधार पर समस्याओं को हल कर सकते हैं। 2. बालक 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) करने में सक्षम हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि वे किसी समस्या के समाधान के लिए पहले विभिन्न परिकल्पनाएं (Hypotheses) बनाते हैं और फिर तार्किक रूप से उनका परीक्षण करके सही निष्कर्ष पर पहुंचते हैं। 3. इस चरण के दौरान बालकों की सोच से 'अहमकेंद्रिता' (Egocentrism) पूरी तरह समाप्त हो जाती है और वे वैज्ञानिक पद्धति की तरह व्यवस्थित और तार्किक ढंग से सोचना शुरू कर देते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'पारिस्थितिक तंत्र की कार्यप्रणाली' (Ecosystem Dynamics) और 'ऊर्जा प्रवाह' (Energy Flow) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा 'एकदिशीय' (Unidirectional) होता है, और ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम (Law of Conservation of Energy) के अनुसार जब ऊर्जा एक पोषण स्तर (Trophic Level) से दूसरे पोषण स्तर पर स्थानांतरित होती है, तो कुल ऊर्जा का लगभग 90% भाग श्वसन, ऊष्मा और उपापचय क्रियाओं में क्षय हो जाता है, तथा केवल 10% ऊर्जा ही अगले स्तर तक पहुँच पाती है, जिसे लिंडेमैन का 'दस प्रतिशत का नियम' (10% Law) कहा जाता है। 2. पारिस्थितिक तंत्र में विभिन्न जीवों के बीच खाद्य ऊर्जा के स्थानांतरण के मार्ग को 'खाद्य जाल' (Food Web) कहा जाता है, जो एक सीधी रेखा में चलता है और इसमें ऊर्जा का कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं होता है, जबकि 'खाद्य श्रृंखला' (Food Chain) अनेक जटिल और परस्पर जुड़ी हुई श्रृंखलाओं का समूह होती है। 3. किसी भी पारिस्थितिक तंत्र का 'ऊर्जा का पिरामिड' (Pyramid of Energy) सदैव सीधा (Upright) बनता है, क्योंकि उत्पादकों से लेकर शीर्ष उपभोक्ताओं तक प्रत्येक क्रमिक पोषण स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा की मात्रा घटती जाती है, और इसे किसी भी परिस्थिति में उल्टा नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता और समस्या समाधान' (Creativity and Problem Solving) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जोसफ गिल्फ़र्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking: फ्लुएंसी, फ्लेक्सिबिलिटी, ओरिजिनलिटी और एलैबोरेशन) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex), 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), और 'एंटिरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex) के बीच संज्ञानात्मक लचीलेपन, अनियोजित विचार जनरेशन (Spontaneous Idea Generation), और抑制 नियंत्रण (Inhibitory Control) की सक्रियण गतिकी, तथा ग्राहम वालेस (Graham Wallas) के 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरण' (तैयारी, उद्भवन, प्रदीप्ति और सत्यापन) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Creativity Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में मौलिक समस्या-समाधान कौशल, पार्श्व चिंतन (Lateral Thinking) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? हिंदी भाषा शिक्षण और व्याकरण के अंतर्गत, 'रचना की दृष्टि से वाक्य के भेद' और 'अर्थ की दृष्टि से वाक्य के भेद' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रचना के आधार पर वाक्य के तीन प्रमुख भेद होते हैं - सरल वाक्य, मिश्र वाक्य और संयुक्त वाक्य। 2. अर्थ के आधार पर वाक्य के कुल छह भेद होते हैं जिनमें विधानवाचक, निषेधवाचक, आज्ञावाचक, प्रश्नवाचक, इच्छावाचक और विस्मयबोधक शामिल हैं। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण में 'अनुपस्थिति एवं पुनर्भरण चक्र' (Feedback Loop) और पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन ऊर्जा प्रवाह (Flow of Energy) के संबंध में सबसे अधिक सटीक है?
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