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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) और 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) के संदर्भ में, सैमुअल किर्क (Samuel Kirk) द्वारा पहली बार प्रतिपादित शब्द 'लर्निंग डिसेबिलिटी' के अंतर्गत आने वाली प्रमुख विशिष्ट अक्षमताओं—जैसे 'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia), 'डिस्ग्राफिया' (Dysgraphia), 'डिस्कैल्कुलिया' (Dyscalculia), 'डिस्प्रैक्सिया' (Dyspraxia), और 'अफेसिया/डिस्फेसिया' (Aphasia/Dysphasia)—के न्यूरोलॉजिकल और मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा विशेष आवश्यकता वाले बालकों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) एवं 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPWD Act 2016) के अंतर्गत परिभाषित प्रावधानों के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न में अधिगम अक्षमताओं (Learning Disabilities) और समावेशी शिक्षा के विधिक प्रावधानों के वैचारिक और वैज्ञानिक स्वरूप का विश्लेषण किया गया है। 'अफेसिया' या 'डिस्फेसिया' मस्तिष्क में क्षति के कारण भाषा को समझने या व्यक्त करने की क्षमता (Language Disorder) को प्रभावित करता है। वहीं, 'डिस्ग्राफिया' एक विशिष्ट लेखन अक्षमता है जो वर्तनी, लेखन कौशल और विचारों की लिखित अभिव्यक्ति को बाधित करती है। 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPWD Act 2016) के तहत 'विशिष्ट अधिगम विकलांगता' (Specific Learning Disabilities) को आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई है। अतः विकल्प (b) पूर्णतः सत्य और सटीक है, जबकि अन्य विकल्प तथ्यात्मक रूप से भ्रामक और असत्य हैं।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'भाषा विकास और विचार' (Language Development and Thought) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) और लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के भाषा और विचार के सिद्धांतों के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ब्रोका क्षेत्र' (Broca's Area), 'वर्निक क्षेत्र' (Wernicke's Area), 'आर्क्यूएट फैसीकुलस' (Arcuate Fasciculus), और 'डॉसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) के बीच प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व (Symbolic Representation), आन्तरिक वाक् (Inner Speech) समेकन, और सामाजिक-सांस्कृतिक मध्यस्थता की सक्रियण गतिकी, तथा नोआम चोमस्की (Noam Chomsky) के 'भाषा अधिग्रहण उपकरण' (LAD - Language Acquisition Device) और 'सार्वव्यापक व्याकरण' (Universal Grammar) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-लिंग्विस्टिक ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Linguistic Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुभाषी दक्षता, संज्ञानात्मक लचीलेपन व समग्र संप्रेषण कौशल के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम में 'रूब्रिक्स' (Rubrics) का उपयोग मुख्य रूप से किस उद्देश्य के लिए किया जाता है?
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हिंदी भाषा शिक्षण और व्याकरण के संदर्भ में, पाणिनी की अष्टाध्यायी पर आधारित कात्यायन (वररुचि) द्वारा रचित 'वार्तिक' ग्रंथ की मूल भाषागत विशेषता और पाणिनी के सूत्रों में सुधार या संशोधन प्रस्तुत करने की पद्धति को निम्नलिखित में से किस रूप में सबसे सटीक रूप से परिभाषित किया जाता है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के त्रिआयामी सिद्धांत' (Structure of Intellect Model) के संदर्भ में, अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत के अनुसार, बौद्धिक योग्यताओं को तीन स्वतंत्र विमाओं (Dimensions)—संक्रियाओं (Operations), विषय-वस्तु (Contents), और उत्पादों (Products)—में वर्गीकृत किया गया है। प्रारंभिक मॉडल में कुल 120कोष्ठ (Cells) थे, जिन्हें बाद में संशोधित करके 150 और अंततः 180 कर दिया गया। इस त्रिआयामी मॉडल के 'विषय-वस्तु' (Contents) विमा के अंतर्गत निम्नलिखित में से किस एक श्रेणी को सम्मिलित नहीं किया जाता है?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, 'वैदिक शिक्षा की प्रमुख संस्थाओं और उपाधियों' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राचीन वैदिक काल में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को उनकी शिक्षा की अवधि और वेदों के अध्ययन के स्तर के आधार पर विभिन्न उपाधियाँ दी जाती थीं, जैसे- एक वेद का अध्ययन करने वाले को 'स्नातक', दो वेदों का अध्ययन करने वाले को 'वसु', तीन वेदों का अध्ययन करने वाले को 'रुद्र', तथा चारों वेदों का अध्ययन करने वाले को 'आदित्य' कहा जाता था।
2. प्राचीन काल में समावर्तन संस्कार (Education Completion Ceremony) के बाद गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने वाले युवा स्नातक को 'विद्यार्थी' या 'स्नातक' कहा जाता था, और इस अवसर पर गुरु द्वारा छात्र को 'सत्यं वद, धर्मं चर' (सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो) का दीक्षांत उपदेश दिया जाता था, जो तैत्तिरीय उपनिषद में उल्लिखित है।
3. प्राचीन काल में महिलाओं की शिक्षा के संबंध में दो प्रकार की विदुषी महिलाएँ होती थीं- 'ब्रह्मवादिनी', जो आजीवन अविवाहित रहकर वेदों और दर्शन का उच्च अध्ययन करती थीं, तथा 'सद्योवधू', जो विवाह के बाद तक ही शिक्षा प्राप्त करती थीं और गृहस्थ जीवन में प्रवेश करती थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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