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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के संदर्भ में, औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) के अंतर्गत 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा डेविड एल्किंड (David Elkind) द्वारा प्रतिपादित 'किशोर अहंकेन्द्रिता' (Adolescent Egocentrism) की संकल्पना के दो प्रमुख घटकों—'काल्पनिक दर्शक' (Imaginary Audience) और 'व्यक्तिगत कथा' (Personal Fable)—के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की अंतिम अवस्था 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) में बालकों में 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'अमूर्त चिंतन' की क्षमता विकसित होती है, जिससे वे वैज्ञानिक पद्धति की तरह विभिन्न संभावनाओं और परिकल्पनाओं का तार्किक परीक्षण कर सकते हैं। इसके साथ ही, मनोवैज्ञानिक डेविड एल्किंड (David Elkind) ने इस आयु वर्ग में 'किशोर अहंकेन्द्रिता' (Adolescent Egocentrism) को स्पष्ट किया, जिसके दो मुख्य पहलू हैं—1. 'काल्पनिक दर्शक' (Imaginary Audience), जिसमें किशोर को लगता है कि हर कोई उस पर ध्यान दे रहा है और उसका मूल्यांकन कर रहा है, और 2. 'व्यक्तिगत कथा' (Personal Fable), जिसमें किशोर अपनी भावनाओं और अनुभवों को पूरी तरह अनोखा और अद्वितीय मानता है (जैसे 'कोई मेरी स्थिति को समझ नहीं सकता')। विकल्प (c) इन दोनों मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं के वैज्ञानिक और पारस्परिक संबंधों का पूर्ण और सटीक वर्णन करता है।
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