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पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संदर्भ में 'जैविक मुक्ताकाश विसरण' या 'फाइटोरेमीडिएशन' (Phytoremediation) की एक विशिष्ट तकनीक 'फाइटोवोलटिलाइजेशन' (Phytovolatilization) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. फाइटोवोलटिलाइजेशन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे अपनी जड़ों के माध्यम से प्रदूषकों (जैसे प्रदूषित जल से वाष्पशील कार्बनिक यौगिक या सेलेनियम) को अवशोषित करते हैं और फिर उन्हें अपने पत्तों के माध्यम से वाष्प के रूप में वायुमंडल में छोड़ देते हैं।
  2. 2. इस प्रक्रिया में पौधे प्रदूषकों को अपने ऊतकों में हमेशा के लिए संचित (Accumulate) कर लेते हैं और उन्हें किसी भी रूप में परिवर्तित या उत्सर्जित नहीं करते हैं।
  3. 3. यह तकनीक मुख्य रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी है जहाँ भू-जल (Groundwater) या मृदा में कुछ विशेष प्रदूषक घुले होते हैं जिन्हें पौधे वाष्पीकृत करके कम हानिकारक रूपों में बदल सकते हैं।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि फाइटोवोलटिलाइजेशन (Phytovolatilization) फाइटोरेमीडिएशन की वह तकनीक है जिसमें पौधे भूमिगत जल या मृदा से प्रदूषकों को अवशोषित करते हैं और वाष्पीकरण के माध्यम से उन्हें वायुमंडल में छोड़ देते हैं (जैसे सेलेनियम या पारे के मामले में)। कथन 2 गलत है क्योंकि इस प्रक्रिया में पौधे प्रदूषकों को केवल अपने ऊतकों में संचित नहीं रखते, बल्कि उन्हें रूपांतरित करके वाष्प के रूप में उत्सर्जित करते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि यह तकनीक भू-जल और मृदा के उपचार के लिए अत्यधिक प्रभावी मानी जाती है जहाँ पौधे प्रदूषकों को वाष्पीकृत कर सकते हैं।
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