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पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संदर्भ में 'पारिस्थितिक पदचिह्न' (Ecological Footprint) और 'जैव-क्षमता' (Biocapacity) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'पारिस्थितिक पदचिह्न' किसी व्यक्ति, शहर या देश द्वारा अपनी मांग को पूरा करने (संसाधनों के उपभोग और कचरे को अवशोषित करने) के लिए आवश्यक बायो-उत्पादक भूमि और जल क्षेत्र का एक माप है।
  2. 2. 'जैव-क्षमता' किसी दिए गए क्षेत्र की जैविक रूप से उत्पादक भूमि और जल की वह कुल क्षमता है जो मानव की मांग को पूरा करने के लिए नवीकरणीय संसाधन उत्पन्न करती है और कचरे कोीय रूप से सोखती है।
  3. 3. जब किसी देश या क्षेत्र का 'पारिस्थितिक पदचिह्न' उसकी 'जैव-क्षमता' से अधिक हो जाता है, तो उसे 'पारिस्थितिक घाटा' (Ecological Deficit) कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि वह पारिस्थितिक रूप से अपनी वहन क्षमता (Carrying Capacity) से अधिक उपभोग कर रहा है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

व्याख्या: उपर्युक्त तीनों कथन पूरी तरह से सही हैं। 1. 'पारिस्थितिक पदचिह्न' (Ecological Footprint) वह पैमाना है जो यह आंकता है कि मानव समाज प्रकृति के संसाधनों का उपयोग किस दर से कर रहा है और उसके द्वारा उत्पन्न कचरे (विशेष रूप से कार्बन उत्सर्जन) को सोखने के लिए कितनी जैविक रूप से उत्पादक भूमि की आवश्यकता है। इसे आमतौर पर 'वैश्विक हेक्टेयर' (Global Hectares - gha) में मापा जाता है। 2. 'जैव-क्षमता' (Biocapacity) किसी निश्चित क्षेत्र (जैसे कोई देश या पूरी पृथ्वी) की प्रकृति की वह क्षमता है जो मानव उपभोग के लिए नवीकरणीय संसाधन पैदा कर सकती है और कचरे (जैसे $CO_2$) को निष्प्रभावी कर सकती है। 3. यदि पारिस्थितिक पदचिह्न जैव-क्षमता से अधिक हो जाता है, तो स्थिति 'पारिस्थितिक घाटे' (Ecological Deficit) या 'ओवरशूट' (Overshoot) की कहलाती है, जो पर्यावरण पर अत्यधिक दबाव और वहन क्षमता के उल्लंघन को दर्शाती है।
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