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भारतीय भू-राजनीति और ऐतिहासिक संधियों के संदर्भ में, वर्ष 1884 में ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच हुई किस संधि या समझौते से संबंधित प्रावधानों को लेकर हुए विवाद ने अंततः वर्ष 1903-1904 में ब्रिटिश भारत के तिब्बत अभियान (यंगहसबैंड अभियान) का मार्ग प्रशस्त किया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1890 में ब्रिटिश भारत (वायसराय लॉर्ड लैंसडाउन के कार्यकाल) और तिब्बत (चीन के माध्यम से) के बीच 'कलकत्ता कन्वेंशन' (सिक्किम-तिब्बत संधि) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि के तहत सिक्किम को ब्रिटिश संरक्षक राज्य के रूप में मान्यता दी गई और सिक्किम तथा तिब्बत के बीच की सीमा को निर्धारित किया गया। हालाँकि, तिब्बत की सरकार (लामा प्रशासन) ने इस संधि को मानने से इनकार कर दिया और सीमा पर स्थित चमीथांग (Chemathang) चौकी पर कब्जा बनाए रखा तथा ब्रिटिश व्यापारियों के साथ व्यापार करने से मना कर दिया। इस असहमति और तिब्बत द्वारा ब्रिटिश पत्रों को स्वीकार न करने की जिद के कारण लॉर्ड कर्ज़न ने कर्नल फ्रांसिस यंगहसबैंड के नेतृत्व में वर्ष 1903-1904 में तिब्बत पर सैन्य अभियान (Younghusband Expedition) भेजा, जो अंततः ल्हासा पर अधिकार और 'ल्हासा की संधि' (1904) पर समाप्त हुआ।
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