त्वरित लिंक्स
Indian Polity
5 views
भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 263' के अंतर्गत स्थापित 'अंतर-राज्य परिषद' (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अंतर-राज्य परिषद की स्थापना का अधिकार राष्ट्रपति के पास है, और राष्ट्रपति लोक हित में जब भी ऐसा आवश्यक समझे, इस परिषद की स्थापना कर सकता है तथा इसके सदस्यों की अर्हताएँ और चयन प्रक्रिया निर्धारित कर सकता है।
- 2. यह परिषद एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसकी बैठकें नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष कम से कम तीन बार आयोजित होना अनिवार्य रूप से संविधान में ही उपबंधित किया गया है।
- 3. अंतर-राज्य परिषद का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना और उन पर सलाह देना है, तथा इसके द्वारा दिए गए सभी निर्णय और संस्तुतियाँ संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र सरकार पर पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: अनुच्छेद 263 के अनुसार राष्ट्रपति अंतर-राज्य परिषद की स्थापना कर सकता है, लेकिन इसके सदस्यों की संगठन, प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, न कि विधानिक अर्हताएँ संविधान या राष्ट्रपति द्वारा मनमाने ढंग से (यह राष्ट्रपति की शक्ति के अंतर्गत है, लेकिन इसके गठन और कार्यप्रणाली का उल्लेख है)। हालांकि, परिषद एक 'सलाहकार निकाय' (Advisory Body) है।
कथन 2 गलत है: अंतर-राज्य परिषद एक स्थायी निकाय नहीं है, बल्कि इसे आवश्यकतानुसार राष्ट्रपति द्वारा गठित किया जाता है ( sarkaria commission की सिफारिश पर 1990 में राष्ट्रपति के आदेश से इसका गठन हुआ था)। साथ ही, संविधान में इसकी बैठकों की कोई निश्चित संख्या (जैसे वर्ष में तीन बार) अनिवार्य नहीं की गई है।
कथन 3 गलत है: अंतर-राज्य परिषद के निर्णय या संस्तुतियाँ बाध्यकारी (Binding) नहीं होती हैं, बल्कि इसकी प्रकृति विशुद्ध रूप से परामर्शदात्री (Advisory) है। यह राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने और सामान्य हित के विषयों की जाँच करने का कार्य करती है, न कि विवादों का न्यायिक निर्णय करने का (विवादों का न्यायनिर्णयन अनुच्छेद 262 के तहत न्यायाधिकरणों का कार्य है)। अतः कोई भी कथन सही नहीं है।
Related Questions
→
भारतीय संविधान में आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई कि वह संपूर्ण देश या उसके किसी भाग में 'राष्ट्रीय आपातकाल' की उद्घोषणा कर सकता है, तथा इसी संशोधन के माध्यम से यह भी प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) किसी भी न्यायालय में नहीं की जा सकती।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी कर सकता है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इसका लिखित निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रपति को संसूचित किया गया हो।
3. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' की घोषणा को 44वें संविधान संशोधन द्वारा यह प्रावधानित किया गया कि इसे एक वर्ष से अधिक समय तक तभी जारी रखा जा सकता है जब देश में राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो या चुनाव आयोग यह प्रमाणित करे कि राज्य में विधानसभा के चुनाव कराना तुरंत संभव नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान में 'नीति निर्देशक तत्व' (DPSP) किस देश से लिए गए हैं?
→
भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत नगरपालिकाओं की संरचना, वित्त आयोग तथा जिला एवं महानगर योजना समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-Y के अनुसार प्रत्येक राज्य में एक वित्त आयोग का गठन किया जाएगा, जो नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति का पुनरावलोकन करेगा और यह आयोग पंचायतों के लिए गठित राज्य वित्त आयोग से पृथक् होता है।
2. अनुच्छेद 243-ZD के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य में जिले स्तर पर संपूर्ण जिले के लिए विकास योजना तैयार करने के वास्ते एक जिला योजना समिति (District Planning Committee) का गठन किया जाएगा, और इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम चार-चौथाई (75%) सदस्य जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाएंगे।
3. संविधान के अनुच्छेद 243-Q के अंतर्गत राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा किसी शहरी क्षेत्र को 'औद्योगिक नगरी' (Industrial Township) घोषित कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप उस विशिष्ट औद्योगिक क्षेत्र के लिए नगरपालिका का गठन करना राज्य सरकार के लिए अनिवार्य नहीं रहता है, यदि उस क्षेत्र में किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा नागरिक सेवाएँ प्रदान की जा रही हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243 से 243-O तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा इसके तहत ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली की स्थापना की गई, किंतु 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों के लिए मध्यवर्ती स्तर का गठन करना अनिवार्य नहीं रखा गया।
2. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के संबंध में कार्य करने की शक्ति प्रदान की गई है, और इन विषयों पर कानून बनाना संसद के लिए अनिवार्य किया गया है।
3. प्रत्येक पंचायत के लिए 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल निर्धारित किया गया है, और यदि पंचायत का विघटन 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पूर्व होता है, तो विघटन की तारीख से 6 मास के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य है, तथा इस प्रकार गठित नई पंचायत शेष बची हुई पूरी अवधि के लिए ही कार्य करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्यसभा को 'स्थायी सदन' (Permanent House) क्यों कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.