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Indian Polity
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भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की शक्तियों और कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. निर्वाचन आयोग को संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के अलावा, राज्यों में 'पंचायतों' और 'नगरपालिकाओं' के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति भी प्रत्यक्ष रूप से संविधान के इसी अनुच्छेद द्वारा प्रदान की गई है।
- 2. संविधान में निर्वाचन आयोग के सदस्यों की अहर्ताओं (Qualifications) या पदावधि (Tenure) का कोई विनिर्दिष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, और इसका निर्धारण करने की शक्ति पूरी तरह से संसद को सौंपी गई है।
- 3. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 324 संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों से संबंधित है। राज्यों में पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण अनुच्छेद 243K और 243ZA के तहत 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) द्वारा किया जाता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि संविधान में निर्वाचन आयुक्तों की अहर्ताओं का उल्लेख नहीं है, लेकिन उनकी पदावधि (6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो) का निर्धारण संविधान द्वारा नहीं बल्कि 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (सेवानिवृत्ति शर्तें) अधिनियम, 1991' के तहत संसद द्वारा किया गया है (हालाँकि राष्ट्रपति द्वारा इनकी नियुक्ति होती है, लेकिन पदावधि का निर्धारण संसद के कानून से होता है; फिर भी दूसरा कथन आंशिक रूप से भ्रामक है क्योंकि संविधान स्वयं सदस्यों की संख्या या पदावधि तय नहीं करता)। कथन 3 सत्य है: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया (महाभियोग जैसे आधार पर संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत) के समान ही हटाया जा सकता है। अतः केवल कथन 3 सही है।
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना इस देश के नागरिकों के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के आदर्श को सुनिश्चित करती है, और इन तीनों प्रकार केन्याय के आदर्श को रूस की क्रांति (1917) से भारतीय संविधान में प्रेरणा के रूप में शामिल किया गया था।
2. 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते यह संशोधन संविधान के 'मूलभूत ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचाए।
3. मूल संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्दों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था, और यह आज तक का प्रस्तावना में एकमात्र संशोधन है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी और प्रशासनिक संबंधों तथा 'अंतर-राज्यीय परिषद्' (अनुच्छेद 263) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 263 के तहत अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और यह एक स्थायी निकाय है, जिसका मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच करना, उन पर सलाह देना तथा ऐसे विषयों पर चर्चा करना है जिनमें केंद्र और राज्यों अथवा दो या अधिक राज्यों के समान हित हों।
2. सरकारीिया आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुतियों के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश से गठित अंतर-राज्यीय परिषद् के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्री (जहाँ विधानसभाएँ हैं) तथा राष्ट्रपति द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिपरिषद के कैबिनेट स्तर के मंत्री शामिल होते हैं।
3. अनुच्छेद 263 के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् द्वारा दी गई प्रत्येक संस्तुति या निर्णय केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों पर वैधानिक रूप से पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होते हैं, ताकि संघवाद की भावना को सुदृढ़ किया जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IVक के अंतर्गत समाविष्ट 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, जिसमें समिति ने नागरिकों द्वारा करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक मूल कर्तव्य के रूप में शामिल करने की संस्तुति की थी, जिसे संसद द्वारा स्वीकार नहीं किया गया था।
2. अनुच्छेद 51क के तहत उल्लिखित मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, और इनकी प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) है, जिसका अर्थ यह है कि इनके उल्लंघन पर सीधे उच्चतम न्यायालय द्वारा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में 11वाँ मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य (ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का दायित्व संबंधित माता-पिता या संरक्षक का होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संसद की लोक लेखा समिति (PAC) में लोकसभा से कितने सदस्य होते हैं?
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वित्तीय आपातकाल अनुच्छेद?
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