त्वरित लिंक्स
MPTET
8 views
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के दृष्टिकोण से निम्नलिखित में से कौन सा कथन 'विशिष्ट बालकों' (Exceptional Children) की शिक्षा के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक और मनोवैज्ञानिक रूप से सही है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मूल मंत्र 'प्रत्येक बच्चा अद्वितीय है और सीख सकता है' है। यह प्रणाली विशिष्ट बालकों (चाहे वे प्रतिभाशाली हों या अधिगम अक्षम) को सामान्य कक्षा में एक साथ पढ़ाने की वकालत करती है। इसके लिए व्यवस्था (विद्यालय और शिक्षण पद्धतियों) में बदलाव की आवश्यकता होती है, न कि बच्चे की कमियों को उसकी प्रगति में बाधक मानने की। अतः विकल्प 'b' सबसे उपयुक्त और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, नॉर्मन मंट गोमेरी रीच (Norman A. Milgram) अथवा सामान्यतः संवेग और प्रेरणा के क्षेत्र में प्रयुक्त **'सीखा हुआ लाचारी या अकार्डेड हेल्पलेसनेस' (Learned Helplessness)** की अवधारणा—जिसे मार्टिन सेलिगमैन (Martin Seligman) द्वारा अपने प्रसिद्ध प्रयोगों के माध्यम से व्यापक रूप से स्थापित किया गया—के अंतर्गत उस मनोवैज्ञानिक स्थिति को परिभाषित किया जाता है जिसमें कोई शिक्षार्थी या जीव बार-बार असफलताओं, प्रतिकूल परिस्थितियों और नियंत्रण से परे परिणामों का सामना करने के बाद यह मान लेता है कि उसकी अनुक्रियाओं या प्रयासों का परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिससे वह भविष्य में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह प्रयास करना छोड़ देता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-सम्मान, नैराश्य प्रबंधन (Frustration Management) और शैक्षणिक लचीलेपन (Academic Resilience) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मनोवैज्ञानिक अवधारणा—**'नकारात्मक पुनर्बलन' (Negative Reinforcement)**—जिसे उस प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ किसी अवांछित, कष्टदायक या प्रतिकूल उद्दीपक (Aversive Stimulus) को हटाकर या रोककर वांछित अनुक्रिया (Desirable Response) की संभावना या आवृत्ति को बढ़ाया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुकूली व्यवहार, तनाव मुक्ति और सकारात्मक आदत निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) एवं 'व्यक्तियों-केंद्रित चिकित्सा' (Person-Centred Therapy) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-संकल्पना' (Self-Concept), 'वास्तविक आत्म' (Real Self) बनाम 'आदर्श आत्म' (Ideal Self) के मध्य विसंगति (Incongruence), तथा कक्षा-कक्षीय शिक्षण में 'पूर्णतः कार्यशील व्यक्ति' (Fully Functioning Person) के निर्माण हेतु 'सकारात्मक सम्मान' (Unconditional Positive Regard) और 'सहानुभूतिपूर्ण समझ' (Empathetic Understanding) के अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता का सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार चरण' (Post-Conventional Morality: Social Contract and Individual Rights Orientation)**—जिसे उस उन्नत नैतिक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून पूर्ण या कठोर नहीं हैं, बल्कि वे समाज के बहुसंख्यकों के कल्याण और पारस्परिक समझौते (Social Contract) के आधार पर बनाए गए हैं, और यदि कोई कानून मानवाधिकारों या न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध हो, तो उसे लोकतांत्रिक तरीकों से बदला जा सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वभौमिक न्याय के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडविन गुथरी (Edwin Guthrie) के 'समीप्यता का अधिगम सिद्धांत' (Contiguity Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'एकल-प्रयास अधिगम' (One-Trial Learning)**—जिसे उस मूल मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जो यह स्पष्ट करता है कि किसी उद्दीपक (Stimulus) और अनुक्रिया (Response) के बीच का साहचर्य अपनी पहली ही बार में पूर्ण शक्ति प्राप्त कर लेता है यदि उनके बीच की समय और स्थान की निकटता (Contiguity) सटीक हो, और पुनरावृत्ति (Repetition) केवल आदतों की संख्या बढ़ाती है न कि साहचर्य की ताकत को—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आदत निर्माण, त्रुटि निवारण और तात्कालिक अनुक्रिया संधारण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.