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History of India
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, ऋग्वैदिक कालीन नदियों के प्राचीन और उनके आधुनिक नामों का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ऋग्वेद में उल्लिखित नदियाँ और उनके आधुनिक नाम इस प्रकार हैं: 'कुभा' को काबुल नदी, 'परुष्णी' को रावी नदी, 'सुवास्तु' को स्वात नदी कहा जाता था। वहीं 'क्रुमु' नदी का आधुनिक नाम 'कुर्रम' नहीं बल्कि 'क्रुमु' ही है, जिसे आधुनिक संदर्भ में 'कुर्रम' नदी (अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र) कहा जाता है। हालांकि, एक अन्य महत्वपूर्ण नदी 'सदाानीरा' का आधुनिक नाम गंडक है और 'कुभा' का काबुल है। यहाँ सभी विकल्प सही हैं क्योंकि क्रुमु का आधुनिक नाम कुर्रम ही है। एक अधिक कठिन विकल्प के रूप में 'सतुद्रि' (सतलुज) या 'विपाशा' (ब्यास) का प्रयोग किया जाता है। चूँकि विकल्प (d) क्रुमु का कुर्रम सही रूप से सुमेलित है, इस प्रश्न में कोई भी युग्म असुमेलित नहीं है, अतः इस प्रकार के उच्च स्तरीय प्रश्नों में परीक्षार्थी को ऋग्वैदिक भूगोल की गहरी समझ होनी चाहिए। (नोट: इस प्रश्न का उद्देश्य छात्रों को उत्तर पश्चिमी अफगानिस्तान और पंजाब की नदियों के प्राचीन नामों से परिचित कराना है)।
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वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के राजनीतिक, प्रशासनिक और स्थापत्य विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को निर्णायक रूप से पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी और इसी विजय के स्मरणोत्सव स्वरूप महाबलीपुरम में प्रसिद्ध एकश्म (monolithic) रथ मंदिरों का निर्माण कार्य आरंभ कराया था।
2. चोल राजवंश के उत्तरमेरूर शिलालेख (परांतक प्रथम के शासनकाल के) से ग्राम प्रशासन की स्वायत्तता का विस्तृत विवरण मिलता है, जिसके अनुसार 'उर' सामान्य ग्राम सभा थी, 'सभा' अग्रहार या ब्राह्मण बहुल गाँवों की स्वायत्त सभा थी, और 'नगरम्' व्यापारियों की संस्था थी।
3. हर्षवर्धन के शासनकाल में आयोजित 'कन्नौज की महाधर्म परिषद' का मुख्य उद्देश्य केवल हीनयान बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करना था, और चीनी यात्री ह्वेनसांग ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय के हाथों हुई पराजय का अपनी यात्रा वृत्तांत में पूर्णतः खंडन किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, राजस्व सुधारों और सैन्य संगठनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा प्रारंभ की गई 'दहशाला' (या जपती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और उनके प्रचलित बाजार मूल्यों का आकलन कर मालगुजारी का निर्धारण किया जाता था।
2. जहांगीर के शासनकाल में चित्रकला के साथ-साथ स्थापत्य कला में भी अभूतपूर्व विकास हुआ, और उसने शाहजहां से पहले ही संगमरमर पर 'पित्रा दुरे' (Pietra Dura) यानी जड़ाऊ कला का प्रयोग एतमाद-उद-दौला के मकबरे में पहली बार करवाया था।
3. शाहजहां के काल में मनसबदारी व्यवस्था में 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली को जोड़ा गया था, जिसके माध्यम से मनसबदारों को बिना अपने जात पद को बढ़ाए अधिक घुड़सवार सैनिक रखने की विशेष अनुमति दी गई थी।
4. औरंगजेब के शासनकाल में साम्राज्य का भौगोलिक विस्तार अपने चरम पर पहुँच गया था, और उसके द्वारा पुनः 'झरोखा दर्शन', 'तुलादान' और सिक्कों पर कलमा खुदवाने जैसी परंपराओं को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप और उसकी प्रकृति के संबंध में विभिन्न ब्रिटिश एवं भारतीय इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध मतों और कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था" - आर.सी. मजूमदार
2. "यह विशुद्ध रूप से एक देशभक्तिपूर्ण स्वतंत्रता संग्राम था, जो विदेशी शासन के विरुद्ध सुनियोजित राष्ट्रीय विद्रोह के रूप में लड़ा गया था" - वी.डी. सावरकर
3. "यह एक सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था, जिसे भारतीय जनता द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए अंतिम युद्ध के रूप में लड़ा गया था" - बेंजामिन डिजरायली
4. "यह मूलतः सिपाहियों का विद्रोह था, जिसका चरित्र पूरी तरह से सैनिक था और इसमें राष्ट्रीय भावना का पूर्ण अभाव था" - सर जॉन लॉरेन और सी.आर. रीस
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, सैन्य और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, तुगलक और खिलजी वंश के दौरान उठाए गए निम्नलिखित कदमों पर विचार कीजिए:
1. सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के साथ-साथ राज्य की वित्तीय स्थिति को सुधारने और धातु की कमी से निपटने के लिए तांबे और कांसे के 'सांकेतिक सिक्के' (Token Currency) चलाए, जिन्हें राज्य द्वारा सोने-चांदी के सिक्कों के समान विनिमय मूल्य पर मान्यता दी गई थी, किंतु नकली सिक्कों के प्रचलन और प्रशासनिक विफलता के कारण यह प्रयोग असफल हो गया।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में सबसे पहले कृषकों से लिए जाने वाले सभी पुराने करों (जैसे गृह कर 'घरई' और चराई कर 'चराई') को पूरी तरह समाप्त कर दिया और केवल कृषि उपज पर लगने वाले भू-राजस्व को ही एकमात्र कर के रूप में स्वीकार किया।
3. फिरोजशाह तुगलक ने अपने शासनकाल में शरीयत के विरुद्ध लिए जाने वाले चौबीस कष्टदायक करों को समाप्त कर दिया और केवल चार करों (खराज, जकात, जजिया और खुम्स) को वैध रखा, तथा सिंचाई की सुविधा के लिए बड़ी संख्या में नहरों का निर्माण कराते हुए हक-ए-शर्ब (सिंचाई कर) नामक एक नया कर भी लगाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकठिया' प्रणाली थोपी गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी भूमि के प्रत्येक बीघे के तीन-बीसवें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ती थी।
2. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान फसलें नष्ट हो जाने और अकाल की स्थिति होने के बावजूद जब ब्रिटिश प्रशासन ने राजस्व वसूली माफ नहीं की, तो गांधीजी ने किसानों को लगान न चुकाने का आह्वान किया, और इसी आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल गांधीजी के प्रमुख सहयोगियों के रूप में उभरे।
3. चंपारण सत्याग्रह के सफल होने के बाद महात्मा गांधी ने पहली बार भारत में 'भूख हड़ताल' (Hunger Strike) का अस्त्र के रूप में प्रयोग किया था, तथा खेड़ा सत्याग्रह उनका पहला सविनय अवज्ञा (Civil Disobedience) प्रयोग था।
4. चंपारण जाँच समिति के समक्ष किसानों की समस्याओं को उजागर करने में राजकुमार शुक्ल ने निर्णायक भूमिका निभाई थी, और इस समिति के एक सदस्य के रूप में महात्मा गांधी ने भी हस्ताक्षर किए थे जिससे बागान मालिकों की मनमानी समाप्त हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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