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मानव शरीर की कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. माइटोकॉन्ड्रिया के पास अपना स्वयंभू डीएनए (DNA) और राइबोसोम होते हैं।
- 2. आंतरिक माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली (Inner mitochondrial membrane) पर 'क्रिस्टी' (Cristae) नामक संरचनाएं होती हैं जो एटीपी (ATP) संश्लेषण के लिए सतह क्षेत्र को बढ़ाती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का 'पावरहाउस' कहा जाता है। इसके पास अपना स्वयं का वृत्ताकार डीएनए (mitochondrial DNA) और 70S प्रकार के राइबोसोम होते हैं, जिसके कारण यह अपने कुछ आवश्यक प्रोटीन स्वयं संश्लेषित कर सकता है। इसकी आंतरिक झिल्ली अंगुली जैसी वलित संरचनाएं बनाती है जिन्हें 'क्रिस्टी' (Cristae) कहते हैं। ये क्रिस्टी ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलेशन और एटीपी (ATP) के निर्माण के लिए उपलब्ध सतह के क्षेत्रफल को काफी बढ़ा देती हैं। अतः दोनों कथन पूर्णतः सत्य हैं।
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एक अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब हमेशा कैसा होता है?
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धातुकर्म (Metallurgy) और धातुओं के निष्कर्षण के प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रगलन (Smelting) एक ऐसी ताप-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को उसके गलनांक से नीचे के तापमान पर वायु की अधिकता में गर्म किया जाता है ताकि वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो सकें।
2. झाग उत्प्लवन विधि (Froth Flotation Method) मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण के लिए प्रयुक्त की जाती है, जिसमें पाइन तेल और चीड़ के तेल का उपयोग फेन (Froth) बनाने के लिए किया जाता है, और यह विधि गीले करने के गुणों (Wetting properties) के अंतर पर आधारित है।
3. बेसेमरीकरण (Bessemerisation) प्रक्रम का उपयोग कच्चे लोहे (Pig Iron) से ढलवां लोहा (Cast Iron) बनाने के लिए किया जाता है, जिसमें गलित धातु में गर्म वायु का झोंका प्रवाहित करके अवांछित कार्बन, सिलिकॉन और मैंगनीज का ऑक्सीकरण किया जाता है।
4. एल्युमीनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Heroult Process) में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पार ($CaF_2$) के मिश्रण में घोलकर उसका विद्युत अपघटन किया जाता है, जिससे क्रायोलाइट विलायक के गलनांक को कम करने और विद्युत चालकता बढ़ाने का कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूकेरियोटिक कोशिका के कोशिकांगों (Organelles) और उनके विशिष्ट कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गॉल्जी उपकरण (Golgi apparatus) में 'सिस्टर्नी' (Cisternae) की संरचना ध्रुवीय होती है, जिसमें 'cis' चेहरा (निर्माण चेहरा) आमतौर पर अंतःद्रव्यी जालिका (ER) की ओर होता है और 'trans' चेहरा (परिपक्व चेहरा) प्लाज्मा झिल्ली की ओर उन्मुख होता है, जो प्रोटीन के रूपांतरण और पैकेजिंग के लिए उत्तरदायी है।
2. लाइसोसोम में उपस्थित 'हाइड्रोलिटिक एंजाइम' (जैसे- लाइपेस, प्रोटीएज और कार्बोहाइड्रेटेज) अम्लीय pH (लगभग 4.5 से 5.0) पर सर्वाधिक सक्रिय होते हैं, और इस अम्लीय वातावरण को बनाए रखने के लिए लाइसोसोम की झिल्ली में हाइड्रोजन आयन ($H^+$) पंप (ATP-ase) सक्रिय रूप से कार्य करते हैं।
3. माइटोकॉन्ड्रिया और हरित लवक (Chloroplast) दोनों ही अर्द्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग हैं क्योंकि इनमें वृत्ताकार डीएनए (DNA), 70S प्रकार के राइबोसोम होते हैं, और ये अपने सभी आवश्यक प्रोटीन का संश्लेषण स्वयं स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं, जिसके लिए इन्हें केंद्रकीय डीएनए की सहायता की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधनों के रासायनिक एवं भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जो सामान्यतः प्रतिस्थापन (Substitution) अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं, जबकि एल्कीन और एल्काइन असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होने के कारण मुख्य रूप से योगात्मक (Addition) अभिक्रियाएँ दर्शाते हैं।
2. ऑक्टेन संख्या (Octane Number) पेट्रोल की 'विस्फोटक रोधी' (Anti-knock) क्षमता का माप है, और उच्च ऑक्टेन संख्या प्राप्त करने के लिए 'आइसो-ऑक्टेन' को संदर्भ मानक माना जाता है जिसका ऑक्टेन मान 100 निर्धारित किया गया है, जबकि 'n-हेप्टेन' का ऑक्टेन मान शून्य होता है।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, और सुरक्षा की दृष्टि से इसमें जो गंधयुक्त पदार्थ मिलाया जाता है, वह एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) होता है।
4. जब एसिटिलीन ($C_2H_2$) को कॉपर(I) क्लोराइड के अमोनियामय विलयन के साथ अभिकृत किया जाता है, तो यह क्यूप्रस एसिटिलाइड का लाल-भूरा अवक्षेप बनाता है, जो अंतस्थ एल्काइन (Terminal Alkyne) की अम्लीय प्रकृति को स्पष्ट करता है, जिसका विस्तृत विवरण विकिपीडिया संदर्भ में दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के विभिन्न रासायनिक पहलुओं और उनके जलीय विलयन व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो प्रोटॉन ($H^+$) दान करने की प्रवृत्ति रखते हैं, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) अत्यधिक दुर्बल प्रकृति का होता है।
2. लुईस (Lewis) संकल्पना के आधार पर, वे यौगिक जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं, लुईस क्षार कहलाते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने वाली स्पीशीज लुईस अम्ल होती हैं।
3. जब सोडियम एसीटेट ($CH_3COONa$) जैसे दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण का जलीय अपघटन किया जाता है, तो विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयनों ($OH^-$) की अधिकता के कारण विलयन का pH मान 7 से अधिक होता है।
4. आरहेनियस सिद्धांत केवल जलीय माध्यम में अम्लीय और क्षारीय गुणों की व्याख्या करने तक सीमित है और यह अमोनिया जैसे निर्जलीय विलायकों में क्षारीय व्यवहार को स्पष्ट करने में असमर्थ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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