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मोरक्को के यात्री इब्न बतूता के यात्रा वृत्तांत का क्या नाम है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मोरक्को के प्रसिद्ध यात्री इब्न बतूता के यात्रा वृत्तांत (Travelogue) का नाम 'रेहला' (Rihla) है।
अरबी भाषा में इसका पूरा नाम 'तुहफत अल-नुज्जार फी घराइब अल-अम्सार व अजाइब अल-अस्सार' (Tuhfat an-Nuzzar fi Ghara'ib al-Amsar wa 'Aja'ib al-Asfar) है, जिसका अर्थ है 'उन लोगों के लिए एक उपहार जो शहरों के आश्चर्य और यात्राओं के चमत्कारों को देखना पसंद करते हैं'।
Related Questions
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की स्वायत्तता, शक्तियों और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित हालिया वैधानिक संशोधनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (2) के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा इस संबंध में बनाए गए कानून के अधीन की जाती है, और मूल संविधान में ही इनके कार्यकाल तथा निष्कासन की प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के समान पूर्णतः सुरक्षित किया गया था।
2. 'अनूप बर्नवाल बनाम भारत संघ (2023)' के ऐतिहासिक मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह निर्णय दिया था कि जब तक संसद इस विषय पर कोई कानून नहीं बनाती, तब तक प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक उच्च-स्तरीय समिति राष्ट्रपति को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की सिफारिश करेगी।
3. सर्वोच्च न्यायालय के 2023 के निर्देश के पश्चात संसद द्वारा अधिनियमित 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023' के तहत चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटा दिया गया है, और अब इस समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' (संघ और राज्यों کے अधीन सेवाएँ - अनुच्छेद 308 से 323) के अंतर्गत 'संघ लोक सेवा आयोग' (UPSC) तथा 'राज्य लोक सेवा आयोगों' (SPSC) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग होगा, तथा दो या अधिक राज्य यह करार कर सकते हैं कि संसद विधि द्वारा ऐसे दो या अधिक राज्यों के लिए एक संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) की स्थापना कर सकती है, जिसकी नियुक्ति संबंधित राज्यों के राज्यपालों की संयुक्त संस्तुति पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
2. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य को राष्ट्रपति द्वारा केवल साबित कदाचार (Misbehaviour) या असमर्थता के आधार पर उसके पद से हटाया जा सकता है, किंतु राष्ट्रपति द्वारा ऐसा आदेश तब तक नहीं दिया जा सकता जब तक कि उच्चतम न्यायालय द्वारा (अनुच्छेद 145 के अधीन इस प्रयोजन के लिए बनाए गए नियमों के तहत) की गई जाँच में यह प्रतिवेदित नहीं कर दिया जाता कि ऐसे अध्यक्ष या सदस्य को उस आधार पर हटाया जाना चाहिए।
3. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य की पदावधि उसके पद ग्रहण करने की तिथि से छह वर्ष की अवधि या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) होती है, और अपने पद की समाप्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य नियोजन का पात्र नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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एशिया और उत्तरी अमेरिका को कौन-सी जलसंधि अलग करती है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय उसे यह प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है जो सार्वजनिक महत्व का है, तो वह उस पर सर्वोच्च न्यायालय की राय मांग सकता है, और सर्वोच्च न्यायालय राष्ट्रपति को ऐसी राय देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
2. यदि राष्ट्रपति अनुच्छेद 143 के अधीन किसी पूर्व-संविधान (Pre-constitution) संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य इसी प्रकार के किसी दस्तावेज से उत्पन्न विवाद को सर्वोच्च न्यायालय को परामर्श के लिए भेजता है, तो सर्वोच्च न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य (Mandatory) होता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 143 के तहत दी गई सलाह या राय प्रकृति में सलाहकार होती है और यह भारत सरकार या राष्ट्रपति पर बाध्यकारी नहीं होती है, साथ ही यह निर्णय लेने वाले मामलों की तरह एक 'निर्णायक विधि' (Binding Precedent) भी नहीं बनती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संसद की 'संसदीय समितियाँ' (Parliamentary Committees) तथा विशेष रूप से 'वित्तीय समितियों' (Financial Committees) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) में कुल 22 सदस्य होते हैं, जिनमें से 15 सदस्य लोकसभा से और 7 सदस्य राज्यसभा से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा चुने जाते हैं, तथा इस समिति का अध्यक्ष हमेशा विपक्षी दल से ही नियुक्त किया जाता है, जिसकी परंपरा 1967 से चली आ रही है।
2. प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) संसद की सबसे बड़ी समिति है जिसमें कुल 30 सदस्य होते हैं और सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से ही निर्वाचित होते हैं, तथा राज्यसभा का कोई भी सदस्य इस समिति का हिस्सा नहीं होता है।
3. लोक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिवेदनों और लेखाओं की जाँच करती है, और इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा अपने सदस्यों में से की जाती है, किंतु यदि लोकसभा का कोई मंत्री इस समिति के लिए चुना जाता है, तो वह स्वतः इसका अध्यक्ष बन सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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