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ग्राम पंचायतों के गठन का निर्देश किस अनुच्छेद में है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के संगठन से संबंधित है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX-A' (नगरपालिकाएँ - अनुच्छेद 243-P से 243-ZG) तथा इससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में नगरपालिकाओं को शामिल किया गया और इसके तहत तीन प्रकार की नगरपालिकाओं के गठन का प्रावधान किया गया: नगर पंचायत (संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए), नगर परिषद (लघु नगरीय क्षेत्र के लिए), और नगर निगम (बृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए)।
2. अनुच्छेद 243-U के अनुसार प्रत्येक नगरपालिका का कार्यकाल, यदि उसे पूर्व में विघटित न किया जाए, अपने पहली बैठक के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष का होता है, और यदि किसी नगरपालिका का विघटन पाँच वर्ष की अवधि पूरा होने से पूर्व हो जाता है, तो विघटन की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, तथा इस प्रकार नवगठित नगरपालिका शेष बची हुई पूरी पाँच वर्ष की अवधि के लिए कार्य करती है।
3. प्रत्येक नगरपालिका में वार्ड समितियों (Wards Committees) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो कि उन सभी नगरपालिकाओं के लिए लागू होता है जिनकी कुल जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है, और इन समितियों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर नागरिकों की भागीदारी और शहरी शासन को अधिक प्रभावी बनाना है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 108' के अंतर्गत दोनों सदनों की 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) तथा इससे संबंधित विधायी प्रक्रियाओं के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत किसी विधेयक पर दोनों सदनों के बीच गतिरोध को दूर करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा बुलाई जाने वाली संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल 'साधारण विधجेकों' (Ordinary Bills) और 'वित्तीय विधेयकों' (Financial Bills श्रेणी-I) के मामलों में ही लागू होता है, और इसे किसी भी परिस्थिति में 'धन विधेयकों' (Money Bills) तथा 'संविधान संशोधन विधेयकों' (Constitutional Amendment Bills) के संबंध में आयोजित नहीं किया जा सकता है।
2. यदि किसी साधारण विधेयक को एक सदन द्वारा पारित किए जाने के पश्चात दूसरे सदन में भेजे जाने के बाद छह महीने से अधिक की अवधि बीत जाती है और दूसरा सदन उस विधेयक को अस्वीकार कर देता है या उसमें किए जाने वाले संशोधनों पर दोनों सदन अंतिम रूप से असहमत हो जाते हैं, तो राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आहूत करने की अपनी मंशा को अधिसूचित कर सकते हैं।
3. लोकसभा के विघटन के कारण यदि कोई विधेयक व्यपगत (Lapse) हो चुका है, तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक की अधिसूचना जारी नहीं की जा सकती है, किंतु यदि लोकसभा के विघटन से पहले ही राष्ट्रपति ने संयुक्त बैठक बुलाने के अपने आशय की सूचना संसद को दे दी है, तो लोकसभा के विघटन के बावजूद वह संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी और विधेयक व्यपगत नहीं होगा।
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