त्वरित लिंक्स
Civil services
7 views
किस अनुच्छेद के तहत किसी राज्य में 'राष्ट्रपति शासन' लगाया जाता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 356 के अंतर्गत संवैधानिक तंत्र की विफलता पर राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है।
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंध - अनुच्छेद 256 से 263) तथा 'अंतर-राज्यीय परिषद' (Inter-State Council) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अनुसार राष्ट्रपति को यह शक्ति प्रदान की गई है कि यदि किसी समय यह प्रतीत हो कि एक अंतर-राज्यीय परिषद की स्थापना से लोकहित होगा, तो वह ऐसी परिषद की स्थापना कर सकता है और उसके कृत्यों, संगठन तथा प्रक्रिया को परिभाषित कर सकता है, और यह एक संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है।
2. 'सरकारिया आयोग' (Sarkaria Commission, 1983-88) की मुख्य सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा 'अंतर-राज्यीय परिषद' का गठन किया गया था, जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा वे प्रशासक शामिल होते हैं जिनकी विधानसभाएँ नहीं हैं।
3. अंतर-राज्यीय परिषद के अंतर्गत राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले सभी प्रकार के कानूनी और न्यायिक विवादों का अंतिम रूप से न्यायनिर्णयन (Adjudication) करने की अनन्य शक्ति निहित होती है, और इसके द्वारा दिए गए निर्णय उच्चतम न्यायालय के निर्णयों की तरह सभी पक्षों पर पूरी तरह से बाध्यकारी होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 76' के अंतर्गत 'भारत के महान्यायवादी' (Attorney General for India) के पद, शक्तियों और अधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) पद धारण करता है, जिसके लिए संविधान में उसकी अहर्ताओं (Qualifications) का निर्धारण करने का अधिकार संसद को दिया गया है।
2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों और संसद की किसी भी समिति (जिसका वह सदस्य बनाया गया हो) में बोलने और भाग लेने का अधिकार है, किंतु उसे मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं है।
3. महान्यायवादी को सरकार का पूर्णकालिक विधि अधिकारी (Full-time legal officer) माना जाता है, और उसे भारत सरकार की अनुमति के बिना किसी भी आपराधिक मामले में निजी प्रैक्टिस करने या किसी व्यक्ति का बचाव करने से पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ) के अंतर्गत 'संसदीय विशेषाधिकारों' (Parliamentary Privileges) तथा उनके उल्लंघन या अवमानना के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105 में संसद के सदनों, उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियों, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार संसद सदस्यों को सदन या उसकी किसी समिति में कही गई किसी भी बात या दिए गए किसी भी मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में कोई कानूनी कार्यवाही या सिविल/आपराधिक मुकदमा चलाने से पूर्ण संरक्षण प्राप्त होता है।
2. संसदीय विशेषाधिकारों के अंतर्गत संसद के प्रत्येक सदन को यह अनन्य अधिकार प्राप्त है कि वह अपने सदस्यों के साथ-साथ बाहरी व्यक्तियों को भी अपने विशेषाधिकार के हनन या सदन की अवमानना (Breach of Privilege or Contempt of the House) के लिए दंडित कर सकता है, जिसमें कारावास की सजा देना भी शामिल है।
3. चूँकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105(3) के दूसरे भाग में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि जब तक संसद इन विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध (Codify) नहीं करती है, तब तक इसके विशेषाधिकार ब्रिटेन की 'हाउस ऑफ कॉमन्स' के विशेषाधिकारों के समरूप बने रहेंगे, इसलिए वर्तमान में संसद ने एक व्यापक और पूर्ण अधिनियम पारित करके इन सभी विशेषाधिकारों को पूरी तरह संहिताबद्ध कर दिया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
कांग्रेस के किस अधिवेशन में पहली बार 'स्वराज' शब्द का प्रयोग हुआ?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र और राज्यों के बीच 'विधायी संबंधों' (अनुच्छेद 245 से 255) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को पूरे या भारत के किसी भी भाग के लिए कानून बनाने की प्रादेशिक शक्ति (Territorial jurisdiction) प्राप्त है, तथा संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि उनका अतिरिक्त-प्रादेशिक (Extra-territorial) प्रवर्तन होता है।
2. संविधान की सातवीं अनुसूची की 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) के विषयों पर विधि बनाने की शक्ति संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों को प्राप्त है, किंतु यदि किसी समवर्ती सूची के विषय पर राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून संसद द्वारा बनाए गए पूर्ववर्ती कानून के प्रतिकूल या असंगत है, तो संसद का कानून मान्य होगा और राज्य का कानून उस सीमा तक शून्य हो जाएगा, भले ही राज्य के कानून को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर यह घोषित करे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में प्रगणित किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है, जिसे बार-बार अनिश्चितकाल तक बढ़ाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.