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भारत में सीबकथॉर्न मुख्य रूप से किस क्षेत्र में पाया जाता है?

Detailed Explanation

सीबकथॉर्न मुख्य रूप से हिमालयी ठंडे क्षेत्रों, विशेषकर लद्दाख में पाया जाता है।
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, भारत में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPCC) तथा इससे संबंधित पारिस्थितिकीय पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (NAPCC) के तहत कुल आठ राष्ट्रीय मिशनों की शुरुआत की गई है, जिनमें राष्ट्रीय सौर मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन, संधारणीय कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन, और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं। 2. 'हरित भारत राष्ट्रीय मिशन' (National Mission for a Green India) का प्राथमिक उद्देश्य देश के वन आवरण को बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति उसकी अनुकूलन क्षमता (Adaptation) को मजबूत करना है, जिसके तहत केवल सरकारी वनों पर ध्यान केंद्रित किया गया है और निजी भूमि या कृषि वानिकी को इसके दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। 3. 'संधारणीय आवास पर राष्ट्रीय मिशन' (National Mission on Sustainable Habitat) का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा दक्षता में सुधार करना, शहरी क्षेत्रों में कचरे से ऊर्जा (Waste-to-Energy) का प्रबंधन करना, और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है, ताकि तेजी से हो रहे शहरीकरण के पर्यावरणीय प्रभावों को कम किया जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संसदीय समितियों' (Parliamentary Committees) और विशेष रूप से 'लोक लेखा समिति' (Public Accounts Committee - PAC) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लोक लेखा समिति का गठन प्रत्येक वर्ष किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों से कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से), और इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा पारंपरिक रूप से विपक्ष के वरिष्ठ सदस्यों में से की जाती है। 2. यह समिति भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा प्रस्तुत वार्षिक लेखा-परीक्षण प्रतिवेदनों (Audit Reports) की जाँच करती है, और CAG इस समिति के 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' (Friend, Philosopher and Guide) के रूप में कार्य करता है। 3. चूंकि लोक लेखा समिति के पास नीतिगत मामलों की समीक्षा करने का पूर्ण अधिकार होता है, इसलिए यह किसी सरकारी नीति की वित्तीय विवेकशीलता (Financial Prudence) के साथ-साथ उसकी राजनीतिक या प्रशासनिक उपयोगिता पर भी खुली आलोचनात्मक समीक्षा कर सकती है और अंतिम निर्णय ले सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - अनुच्छेद 36 से 51) तथा 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - अनुच्छेद 44) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार राज्य, भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह उपबंध नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत होने के कारण देश की न्यायपालिका द्वारा स्वतः प्रवर्तनीय (Self-enforceable) है। 2. 'शामला बनाम स्टेट ऑफ पंजाब' और 'सारला मुद्गल बनाम भारत संघ' जैसे ऐतिहासिक सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों में समय-समय पर यह रेखांकित किया गया है कि देश में एक समान नागरिक संहिता का होना राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने और लैंगिक न्याय (Gender Justice) को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत आवश्यक है। 3. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत शामिल अधिकांश प्रावधान भले ही वाद योग्य (Justiciable) नहीं हैं, किंतु संविधान के अनुच्छेद 37 में स्वयं यह स्पष्ट किया गया है कि इसमें अंतर्विष्ट सिद्धांत देश के शासन में मौलिक (Fundamental) हैं और विधि बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? कांग्रेस के किस अधिवेशन में पहली बार 'राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' का प्रस्ताव रखा गया? भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'अटॉनी जनरल ऑफ इंडिया' (भारत के महान्यायवादी - अनुच्छेद 76) तथा 'महाधिवक्ता' (एडवोकेट जनरल - अनुच्छेद 165) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा ऐसे व्यक्ति को की जाती है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह (Qualified) हो, और वह देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, किंतु महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार होने के बावजूद मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। 2. राज्य के महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165) की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और इसके लिए यह आवश्यक है कि वह व्यक्ति उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह हो, तथा उसे राज्य विधानमंडल के सदनों (या विधान परिषद वाले राज्यों में दोनों सदनों) की बैठकों में भाग लेने, बोलने और बिना किसी मतदान के अधिकार के कार्यवाहियों में हिस्सा लेने की शक्ति प्राप्त होती है। 3. 'सोली सोराबजी बनाम भारत संघ' या महान्यायवादी के कार्यकाल से संबंधित अन्य संवैधानिक परंपराओं के अनुसार, महान्यायवादी और राज्य के महाधिवक्ता दोनों का कार्यकाल संविधान द्वारा निश्चित (Fixed Term - जैसे 5 वर्ष) होता है, और इन्हें हटाने की प्रक्रिया ठीक उसी प्रकार होती है जैसी उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने के लिए महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया अपनाई जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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