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पूना पैक्ट (1932) के समय महात्मा गांधी और डॉ. बी. आर. आंबेडकर के बीच समझौता कराने में किसने मध्यस्थता की थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
पंडित मदन मोहन मालवीय ने ही गांधीजी और आंबेडकर के बीच बातचीत कर समझौते का मार्ग प्रशस्त किया था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 76' के अंतर्गत भारत के 'महान्यायवादी' (Attorney General for India) के पद, उसकी शक्तियों और विशेषाधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह व्यक्ति इस पद के लिए योग्य होना चाहिए जिसे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हता प्राप्त हो, तथा संविधान में महान्यायवादी के कार्यकाल को निश्चित किया गया है और उसे हटाने की प्रक्रिया का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, और वह संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों तथा संसद की किसी भी समिति (जिसका वह सदस्य बनाया जाए) की बैठकों में भाग ले सकता है और बोल सकता है, किंतु उसे संसद में मतदान करने का कोई अधिकार नहीं होता है।
3. महान्यायवादी भारत सरकार का पूर्णकालिक विधिक सलाहकार होता है, और उसे किसी भी अन्य निजी विधि प्रैक्टिस या ऐसे मामले में सलाह देने से पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाता है जिसमें भारत सरकार के विरुद्ध हित का टकराव (Conflict of interest) हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग X' के अंतर्गत 'अनुसूचित और जनजाति क्षेत्रों' (Scheduled and Tribal Areas - Articles 244-244A) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की पाँचवीं अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को छोड़कर किसी भी राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है, तथा पाँचवीं अनुसूची के तहत किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने या उसकी सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति राष्ट्रपति को प्राप्त है।
2. छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के लिए विशेष प्रावधान करती है, जिसके तहत इन राज्यों में 'स्वायत्त जिला परिषदों' (Autonomous District Councils - ADCs) के गठन का प्रावधान है, जिन्हें भूमि, वनों, कृषि और सामाजिक रीति-रिवाजों से संबंधित मामलों पर कानून बनाने की विधायी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
3. छठी अनुसूची के अंतर्गत गठित किसी भी स्वायत्त जिला परिषद को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर अनुसूचित जनजातियों के पारंपरिक मुकदमों और विवादों के निस्तारण के लिए ग्राम परिषदों या न्यायालयों के गठन का अधिकार होता है, किंतु इन परिषदों द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के प्रवर्तन के लिए संबंधित राज्य के राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) और 'अनुच्छेद 226' के अंतर्गत उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता के बीच तुलनात्मक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालय न केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बल्कि किसी अन्य कानूनी उद्देश्य (Any Other Purpose) के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं, जिससे उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का दायरा सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत हो जाता है।
2. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय किसी व्यक्ति या प्राधिकरण के विरुद्ध केवल तभी रिट जारी कर सकता है जब वह प्राधिकार भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर स्थित हो, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय उस स्थिति में भी भारत के बाहर स्थित व्यक्ति या सरकार के विरुद्ध रिट जारी कर सकता है यदि वह प्राधिकार उच्च न्यायालय की प्रादेशिक अधिकारिता के अधीन आने वाले राज्य के भीतर से प्रभावित होता हो या कार्य करता हो।
3. राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) के दौरान अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर अन्य सभी मूल अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित किया जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार भी निलंबित हो जाता है, किंतु इस अवधि के दौरान भी उच्च न्यायालयों की अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने की शक्ति स्वतः समाप्त नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' (राजभाषा - अनुच्छेद 343 से 351) तथा आठवीं अनुसूची के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप (1, 2, 3 आदि) होगा, किंतु राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त राजकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रयोग को अधिकृत कर सकता है।
2. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें समय-समय पर विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से बढ़ाया गया, और वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ मान्यता प्राप्त हैं, जिनमें अंग्रेजी और राजस्थानी भाषा भी शामिल हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 351 के अंतर्गत यह निर्देश दिया गया है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके विकास के लिए मुख्य रूप से संस्कृत शब्दावली से ही शब्द ग्रहण करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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हाल ही में किस देश में लगभग 2,000 साल पुरानी ब्राह्मी लिपि की भारतीय सोने की अंगूठियां खोजी गई हैं?
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