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Indian Polity
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विभाजन के बाद संविधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या कितनी रह गई थी?

Detailed Explanation

मूल रूप से संविधान सभा में 389 सदस्य थे, लेकिन विभाजन के बाद यह संख्या घटकर 299 रह गई थी।
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भारतीय संविधान सभा के गठन और उसके सदस्यों के निर्वाचन तथा कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कैबिनेट मिशन योजना (1946) के तहत संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों और मुख्य कमिश्नरी क्षेत्रों की सीटों को प्रमुख रूप से मुस्लिम, सिख और सामान्य - इन तीन समुदायों में विभाजित किया गया था। 2. संविधान सभा के लिए हुए चुनावों में रियासतों (Princely States) को कुल 93 सीटें आवंटित की गई थीं, किंतु रियासतों के शासकों ने प्रारंभ में ही संविधान सभा से दूरी बनाए रखी और उन्होंने इसके चुनावों में भाग लेने या अपने प्रतिनिधियों को मनोनीत करने से पूरी तरह इंकार कर दिया था, जिसके कारण सभा की प्रारंभिक बैठकों में कोई भी रियासती प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ था। 3. संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग को लेकर इस बैठक का पूर्ण बहिष्कार किया था, और फ्रांस की संसदीय परिपाटी के अनुरूप सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Provisional President) चुना गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों और उनके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के माध्यम से कंपनी के राजनीतिक और व्यापारिक कार्यों को पृथक किया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (नियंत्रण बोर्ड) की स्थापना की गई जो राजनीतिक मामलों की देखरेख करता था, और इसे ब्रिटिश कैबिनेट के एक सदस्य के अधीन रखा गया। 2. चार्टर अधिनियम, 1833 द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया, तथा इस अधिनियम ने मद्रास और बॉम्बे के गवर्नरों की विधायी शक्तियों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया, जिससे भारत में केंद्रीय केंद्रीकृत प्रशासन की नींव पड़ी। 3. चार्टर अधिनियम, 1853 के द्वारा गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को स्पष्ट रूप से अलग किया गया, जिसके तहत परिषद में छह नए पार्षदों को जोड़ा गया जिन्हें 'विधान पार्षद' (Legislative Councillors) कहा गया, और सिविल सेवकों की भर्ती के लिए खुली प्रतियोगिता प्रणाली की शुरुआत की गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थापित किया गया था, जिसमें मूल रूप से एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों के प्रावधान की व्यवस्था संविधान निर्माताओं द्वारा की गई थी। 2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी सिफारिश देते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रयोग, सरकारी धन व विज्ञापनों के दुरुपयोग को रोकने तथा राजनीतिक दलों के वैतनिक ऑडिट (Auditing of Accounts) का सुझाव दिया था। 3. जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 77 के तहत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान किए जाने वाले खर्च की अधिकतम सीमा तय की जाती है, और इस सीमा का उल्लंघन करने पर उम्मीदवार को अयोग्य ठहराया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? पंचायत चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु? भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और इससे संबंधित विधायी तथा संवैधानिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 में यह स्पष्ट रूप से उपबंध किया गया है कि यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो अनुच्छेद 5, 6 और 8 के उपबंधों के बावजूद उसका भारत का नागरिक होना स्वतः समाप्त हो जाएगा। 2. संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में उपबंध करने की पूर्ण शक्ति प्रदान करता है, और इसी शक्ति के तहत संसद ने 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' पारित किया, जिसमें अब तक छह बार संशोधन किए जा चुके हैं। 3. जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 35A (जिसे अब समाप्त कर दिया गया है) के अंतर्गत राज्य के 'स्थायी निवास' को परिभाषित करने और विशेष अधिकार देने की शक्ति राज्य विधानमंडल को दी गई थी, किंतु नागरिकता प्रदान करने या समाप्त करने की अनन्य शक्ति हमेशा से केवल भारतीय संसद के पास ही रही है, राज्य विधानमंडल के पास नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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