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भारत में सरकार की किस प्रणाली को अपनाया गया है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भारत ने ब्रिटिश मॉडल पर आधारित संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया है।
Related Questions
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मिन्हाज-उस-सिराज ने 'तबक़ात-ए-नासिरी' की रचना किसके शासनकाल में की थी?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' (राजभाषा - अनुच्छेद 343 से 351) तथा आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा, किंतु राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह संसद की पूर्व अनुमति से अंग्रेजी भाषा का प्रयोग शासकीय प्रयोजनों के लिए अनिश्चितकाल तक बनाए रख सकता है।
2. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें समय-समय पर संशोधनों द्वारा बढ़ाया गया; जिसके तहत 21वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1967 द्वारा सिंधी भाषा को, 71वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को, तथा 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को जोड़ा गया, जिससे वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 351 के अंतर्गत यह निर्देश दिया गया है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके विकास के लिए वह केवल संस्कृत शब्दावली से ही शब्द ग्रहण करे तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों के प्रयोग से बचे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission) का उल्लेख किस अनुच्छेद में है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत संविधान संशोधन की प्रक्रिया तथा इससे संबंधित 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) के दायरे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध को जोड़ने, संशोधित करने या निरूपित करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु इस अनुच्छेद के अंतर्गत संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में केवल 'विशेष बहुमत' (उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) द्वारा ही नहीं, बल्कि प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या के पूर्ण बहुमत द्वारा भी पारित किया जाना अनिवार्य है।
2. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह ऐतिहासिक निर्णय दिया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति है, और संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का सिद्धांत केवल विधायी कानूनों (Ordinary Laws) पर लागू होता है, संविधान संशोधनों पर नहीं।
3. 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 368 स्वयं अपनी संशोधन शक्ति को असीमित या व्यापक बनाने के लिए संशोधित नहीं किया जा सकता, तथा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) संविधान की मूल संरचना का एक अनिवार्य हिस्सा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था के अंतर्गत भारतीय संविधान की 'सातवीं अनुसूची' (Seventh Schedule) के तहत विधायी शक्तियों के वितरण तथा अवशिष्ट शक्तियों (Residuary Powers) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार, संसद को उन सभी मामलों के संबंध में कानून बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में स्पष्ट रूप से प्रगणित नहीं हैं, और इस 'अवशिष्ट शक्ति' के अंतर्गत कर-रोपण (Taxation) करने की शक्ति भी विधायी रूप से केवल और केवल संसद में ही निहित है।
2. 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम हरभजन सिंह ढिल्लों (1971)' और बाद के अन्य न्यायिक निर्णयों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि यदि कोई विषय किसी भी सूची (संघ सूची, राज्य सूची या समवर्ती सूची) की प्रविष्टि में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है, तो संसद को अनुच्छेद 248 और अनुच्छेद 246 की प्रविष्टि 97 (संघ सूची) के तहत उस पर कानून बनाने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है, जिसमें कर लगाने की शक्ति भी शामिल है।
3. राज्य विधानमंडलों को अपनी संबंधित राज्य सूची (सूची-II) के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है, किंतु 'कराधान' (Taxation) के मामले में राज्य सूची की प्रविष्टियाँ पूरी तरह से स्व-निहित (Self-contained) नहीं हैं और राज्य विधानमंडल समवर्ती सूची के विषयों पर भी अपनी कर-रोपण शक्तियाँ का प्रयोग कर सकते हैं यदि संसद ने उस पर कोई कानून नहीं बनाया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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